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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 117

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri द्वितीय अध्याय 89 महर्षि दयानन्द भी पतञ्जलि के मत से सहमत हैं, किन्तु कुल संख्या में से चार को वे मूल वेद स्वीकार करते हैं, अतः उनके अनुसार शाखाओं की कुल संख्या ११३१-४ = ११२६ शेष रहती है। अब हम यहाँ पर चारों वेदों की विभिन्न शाखाओं का पृथक् निरूपण प्रस्तुत कर रहे हैं— ऋग्वेदीय शाखाएँ— जैसा कि पहले बतलाया जा चुका है कि महाभाष्यकार पतञ्जलि ने ऋग्वेद की २१ शाखाओं का निर्देश किया है। 'चरणव्यूहकार' के अनुसार उनमें से केवल पाँच शाखाएँ ही मुख्य हैं। वे निम्नलिखित हैं— १. शाकल शाखा २. वाष्कल शाखा ३. आश्वलायन शाखा ४. माण्डूकायन शाखा ५. सांख्र्यायन शाखा जहाँ तक पुराणों का सम्बन्ध है, प्राचीन पुराणों में ऋग्वेद की २१ तथा अवान्तरकालीन पुराणों में केवल तीन शाखाओं का ही निर्देश मिलता है। आथर्वण परिशिष्ट चरणव्यूह में उपर्युक्त पाँच शाखाओं के अतिरिक्त दो शाखाओं का और नामाल्लेख हुआ है। वे नाम हैं— साध्यायन् तथा औदुम्बर। बौद्ध ग्रन्थ दिव्यावदान में भी ऋग्वेदीय शाखाओं के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। उसके अनुसार पहले शाखाओं के तीन मुख्य विभाग किए गए हैं, तत्पश्चात् उन तीन भागों के कुल २५ उपविभाग किए गए हैं। तीन भाग हैं— शाकल, वाष्कल तथा माण्डव्य, जिनमें शाकल के १०, वाष्कल के ८ तथा माण्डव्य के ७ अवान्तर भाग होते हैं। वाक्यपदीयकार भर्तृहरि ने भी ऋग्वेद की २१ शाखाएँ मानी हैं। यहाँ ऋग्वेद की प्रमुख ५ शाखाओं के विषय में विशेष जानकारी प्रस्तुत की जा रही है— १. शाकल शाखा— ऋग्वेद की आजतक प्रचलित शाखा 'शाकल' के नाम से विख्यात है। 'कात्यायन' ने 'ऋक् सर्वानुक्रमणी' के आदि में ही लिखा है— 'अथर्ऋग्वेदाम्नाये शाकलके।' शाकल शाखा ही मूलतः ऋग्वेद है। यह दस मण्डलों में विभाजित होने के कारण निरुक्तकार द्वारा 'दशतयी' नाम से सम्बोधित की गई है। इस शाखा में कुल १०२८ सूक्त तथा १०६०० मन्त्र हैं। शाकल शाखा से सम्बन्धित उपलब्ध साहित्य निम्नलिखित है— CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar