वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 127, कुल 353 में से
संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri संहिताएँ प्रथम - ऋग्वेद वैदिक मन्त्रों के संग्रहों को 'संहिता' कहा जाता है। वैदिक संहिताएँ मुख्यतः चार हैं :- ऋक् संहिता, यजुः सहिता, साम संहिता तथा अथर्व संहिता। इन चारों संहिताओं में से प्रत्येक का कुछ न कुछ निजी वैशिष्ट्य है किन्तु सम्पूर्ण वैदिक साहित्य की विभिन्न रचनाओं में ऋक् संहिता अति महत्त्वपूर्ण एवं गौरवयुक्त है। विश्व के इतिहास में सभी विद्वान् एवं विचारक निर्विवाद रूप से ऋक् संहिता को प्रथम स्थान पर प्रतिष्ठित करते हैं। 'ऋक् संहिता' ही ऋग्वेद के नाम से प्रख्यात है। भारतीय धर्म तथा दर्शन की दृष्टि से भी ऋग्वेद की पूजनीयता सर्वत्र स्वीकार की गई है। तैत्तरीय संहिता में लिखा है कि- "यद् वै यज्ञस्य साम्ना यजुषा क्रियते शिथिलं तत्, यद् ऋचा तदृढमिति" (तै०स० ६/५/१०/३) "अर्थात् जो विधान साम और यजुः के द्वारा सम्पादित होता है, वह शिथिल है, किन्तु ऋक् के द्वार सम्पादित अनुष्ठान ही दृढ़ होता है।" पुरुषसूक्तानुसार भी ऋचाओं का प्रथम आगम हुआ- "तस्माद् यज्ञात् सर्वहुत ऋचः सामानि जज्ञिरे। छन्दांसि जज्ञिरे तस्मात् यजुस्तस्मादजायत।।" (ऋ० १०/९०/९) "अर्थात् जिस यज्ञ में सभी कुछ अर्थात् सबका आत्मरूप पुरुष आहुत कर दिया जाता है, ऐसे उस यज्ञ से ऋग्वेद और सामवेद उत्पन्न हुए। उससे गायत्री आदि छन्द उत्पन्न हुए, उससे यजुर्वेद उत्पन्न हुआ।" पाश्चात्य वेदज्ञों के अनुसार ऋग्वेद भाषा एवं भाव की दृष्टि से भी अन्य वेदों की अपेक्षा नितान्त प्राचीन है। यह प्राचीनतम भारतीय साहित्य अवश्य है। ऋग्वेद की भाषा से यह भी सिद्ध होता है कि इसका प्रणयन किसी एक काल की निश्चित अवधि में नहीं हुआ। इसमें अति प्राचीन तत्त्वों तथा नवीन तत्त्वों का समन्वय दृष्टिगोचर होता है। इनकी स्थिति भी हिब्रू के स्स्रोतों के समान है, जिनकी रचना एक दीर्घ काल तक की गई और उसके पश्चात् उन्हें एक ग्रन्थ के रूप में पिरो दिया गया। ऋग्वेद का निर्माण काल कितना प्राचीन है, यह अद्यावधि अनुमान का ही विषय है। विद्वानों तथा वेद प्रेमियों के इस विषय में भिन्न-भिन्न विचार हैं। भारतीय मनीषियों के अनुसार वेद CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar