वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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द्वितीय अध्याय 101 अनुवाक् में अनेक सूक्त तथा उन सूक्तों में अनेक ऋचाएँ अथवा मन्त्र संग्रहीत हैं। कात्यायन ने अपनी सर्वानुक्रमणी में इन सभी मन्त्रों की संख्या की गणना करके सपरिश्रम एकत्र उल्लेख किया है। प्राचीन वेद मर्मज्ञों ने वेदों की शुद्धता के निर्वाहार्थ ऋचाओं की क्या, अक्षरों तक की गणना कर रखी है। इससे कोई भी व्यक्ति इन वेदों में स्वनिर्मित नवीन मन्त्रों को देने का दुःसाहस नहीं कर सकता। ऋग्वेद के १० मण्डलों में कुल ८५ अनुवाक् हैं। इन अनुवाकों में १०१७ सूक्त हैं। इन सूक्तों के अतिरिक्त ११ सूक्त और भी हैं, जिन्हें बालखिल्य कहा जाता है। दोनों को योग करने पर सूक्तों की कुल संख्या १०१७+११ = १०२८ हो जाती है। इन बालखिल्य सूक्तों का अधिक महत्त्व नहीं है क्योंकि इनको स्वाध्याय काल में पढ़ा जाता है। इन खिल सूक्तों का न तो पाठ उपलब्ध होता है और न ही इनके अक्षरों की गणना की जाती है। खिल का अर्थ होता है- परिशिष्ट अर्थात् अन्त में संलग्न किए गए मन्त्र। इन सूक्तों का स्थान अष्टम मण्डल में सूक्त ४९ से लेकर सूक्त ५९ तक है। इनके मन्त्रों की संख्या ८० है। इनके स्वरूप का यथार्थ ज्ञान अनुपलब्ध है। अनुवाकानुक्रमणी के ४३वें श्लोक के अनुसार ऋग्वेद के समस्त सूक्तों में निहित मन्त्रों की संख्या 10580¼ है- “ऋचां दश सहस्त्राणि ऋचां पञ्चशतानि च। ऋचामशीतिः पादश्च पारणं संप्रकीर्तितम्॥’’ (अनु० ४३) अतः स्पष्ट है कि प्रत्येक सूक्त में औसतन १० मन्त्र हैं। इसी प्रकार अनुवाकानुक्रमणी के ही ४५वें श्लोक के शब्दों की संख्या के बारे में निर्देश है- “शाकल्यदृष्टेः पदलक्षमेकं सार्धं च वेदे त्रिसहस्रयुक्तम्। शतानि चाष्टौ दशकद्वयं च पदानि षट् चेति हि चर्चितानि।’’ (अनु० ४५) इस श्लोकानुसार ऋग्वेद में शब्दों की कुल संख्या १ लाख ५३ हजार ८ सौ छब्बीस है। ऋग्वेदीय ऋचाओं की संख्या :- मण्डलक्रम के विवेचन में ऋग्वेदीय ऋचाओं की संख्या 10580¼ कही गई है, इसलिए अब ऋग्वेदीय ऋचाओं की संख्या के पृथक् स्पष्टीकरण की क्या आवश्यकता ? वस्तुतः ऋग्वेद में ऋक् मन्त्रों की संख्या का निर्धारण भी एक जटिल समस्या है, विवादग्रस्त विषय है, विभिन्न पुरातन एवं नवीन वेदज्ञों ने इस समस्या को अपने अनुसार पृथक्-पृथक् ढंग से सुलझाया है। ऋचाओं की संख्या निर्धारण में
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar