भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

पृष्ठ 144, कुल 353 में से

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पृष्ठ 144

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 116 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता कामोत्तेजित हो— अन्य॒मू षु त्वं य॑म्य॒न्य उ॒ त्वां परि॑ ष्वजाते॒ लिबु॑जेव वृ॒क्षम्। तस्य॑ वा॒ त्वं मन॑ इ॒च्छा स वा॒ तवाधा॑ कृणुष्व सं॒विद॒ सुभ॑द्राम्॥ (ऋ० १०/१०/१४) अर्थात् हे विवाहित स्त्री ! तू दूसरे मनुष्य को पेड़ की बेल के समान आलिङ्गन न कर और अन्य पुरुष तुम्हारा आलिङ्गन न करें। तू उसके हृदय की इच्छा कर और वह तेरे हृदय की इच्छा करे। तू मङ्गलकारी उत्तम बुद्धि वाली सन्तान उत्पन्न कर। इसमें बहन भाई के वैवाहिक सम्बन्ध का भी निषेध है और यदि परस्पर सन्तानोत्पत्ति में शक्तिहीन हो तो अन्य पुरुष से सन्तान उत्पन्न करने की आज्ञा वेद में प्रतिपादित है। यम-यमी का सम्वाद शिव-पार्वती के सम्वाद का स्मरण दिलाता है। इसका विनियोग क्या हुआ ये अज्ञात है। (स) सोम-सूर्या सम्वाद - यह ऋग्वेद के दशम मण्डल का ८५वाँ सूक्त है। सूर्या सूर्य की बेटी है। इस सूक्त में इसकी 'उषा' संज्ञा है। इसकी सभी ४७ ऋचाएँ वैवाहिक विधि का संकेत करती है। इसकी अधिकांश ऋचाएँ गृह्यसूत्र के विवाह- प्रकरण में भी प्राप्त होती हैं। इसकी कुछ ऋचाओं में नववधू को उत्कृष्ट आशीष से युक्त किया गया है। यथा— इ॒ह प्रियं॑ प्र॒जया॑ ते॒ समृ॑ध्यता॒मस्मिन्गृ॒हे गार्ह॑पत्याय जा॒गृहि। ए॒ना पत्या॑ त॒न्वं१॑सं सृ॑जस्वाधा॒ जिब्री॑ वि॒दथ॒मा व॑दाथः॥२७॥ (ऋ० १०/८५/२७) अर्थात् हे वधू, इस गृह में तुम्हारा प्रिय भाव सन्तान से फले-फूले। इस गृह में गृहस्थ के कर्तव्यार्थ तू जागरण कर। सावधानीपूर्वक प्रबन्ध को कर। इस पति के साथ स्वशरीर को संयुक्त कर दे। पति के कार्यों में हाथ बँटा और जीर्ण हुई वृद्धि में वृद्धि कर। घर को आदेश देती रह। (द) सरमा-पणि सम्वाद - यह ऋग्वेद के दशम मण्डल का १०८वाँ सूक्त है। इसमें इन्द्र की दूती सरमा तथा पणियों का सम्वाद चलता है। वह पणियों द्वारा अपहृत इन्द्र की गौओं को वापस लौटाने को कहती है, किन्तु वे इस विषय पर बात न करके उसे लालच देते हैं। उसे अपनी बहन बनाते हैं। किन्तु सरमा उनके बहकावे में नहीं आती। पणिगण कहते हैं— CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar

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