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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri द्वितीय अध्याय 125 निम्नलिखित मन्त्र में पति को पुरुषत्व-सम्पन्न तथा उत्तम सन्तान को उत्पन्न करने में समर्थ होने के लिए कामना की गई है- इ॒मां त्वमि॑न्द्र मीढ्वः सु॒पुत्रां सु॒भगां॑ कृणु। दशा॑स्यां पु॒त्राना धे॑हि॒ पति॑मेकाद॒शं कृ॑धि॥४५॥ (ऋ० १०/८५/४५) अर्थात् हे ऐश्वर्य एवं धन सम्पन्न पति! तू वीर्य सिंचन में पूर्ण समर्थ हो। अतः इस स्त्री को धन से सौभाग्यवती तथा वीर्य से उत्तम सन्तान वाली कर। इसमें दस पुत्रों को धारण करा। ग्यारहवाँ पति इन सबको सकुशल रखे, हे भगवन्, तुमसे यही विनती है। ऋग्वेद के सप्तम मण्डल का १०३वाँ सूक्त मण्डूकों के वर्णन से युक्त है, जिसमें मण्डूकों तथा ब्रह्म में साम्य प्रदर्शित किया गया है। वर्षा ऋतु में मण्डूक भी अपनी ऐश्वर्य वृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं- गोमा॑यु॒रदा॑द॒जमा॑यु॒रदा॒त्पृश्नि॑रदा॒द्धरि॑तो॒ नो॒ वसू॑नि। गवां॑ म॒ण्डूका॒ दद॑तः श॒तानि॑ सहस्रसा॒वे प्र ति॑रन्त॒ आयु॑:॥ (ऋ० ७/१०३/१०) अर्थात् रम्य शब्दों वाले वर्षाकालोद्भव जन्तु तथा प्रकृत्यनुसारी शब्दों वाले, विचित्र वर्णों वाले, हारतवां वाले- ये सभी अपनी रचना से हमको शिक्षा दें। अपनी शिक्षा से विद्यारूपी चमत्कार की वृद्धि करने वाले सैकड़ों प्रकार की शिक्षा हमको दें और परमात्मा ऐश्वर्य तथा आयु की वृद्धि करें और सहस्रसाव (जिसमें अनन्त प्रकार की औषधियाँ होती हैं), वह वर्षाकाल में परमात्मा हमको उपर्युक्त प्रकार के प्राणधारियों से अनन्त प्रकार का शिक्षा लाभ कराएँ तथा हमारे ऐश्वर्य तथा आयु की वृद्धि करें। उपर्युक्त ऐश्वर्यवृद्धि के निमित्त की गई प्रार्थना का भाव अत्यन्त मार्मिक तथा स्पष्ट है। यज्ञ संस्था :- आर्य संस्कृति में यज्ञ की प्रधानता है। वेद इस जगत् के मूल में यज्ञ की भावना को स्वीकार करते हैं। ऋग्वेद के पुरुषसूक्त से ज्ञात होता है कि उसके रचनाकाल तक यज्ञ संस्था पूर्णरूपेण विकसित हो चुकी थी। प्रजापति ही इस विश्वरूपी यज्ञ का याजक, होता, अध्वर्यु तथा पुरोहित है। यही नहीं, इस यज्ञ में उसने स्वयं को भी CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar