वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 162, कुल 353 में से
संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 134 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता समाजविज्ञान की दृष्टि से वर्ण-व्यवस्था, समस्त वर्णों के कर्तव्य एवं अधिकार, समष्टि व व्यष्टि का सम्बन्ध, विवाह संस्कार, नगर, पुर तथा ग्रामादि, भोजन-पान, वेशभूषा, साज-सज्जा, अलंकरण आदि के विषय में उपयोगी सामग्री इसमें उपलब्ध होती है। ऐतिहासिक तत्त्वों में पुरातत्त्व, युग, कल्प, प्रलय, ऋषि एवं राजाओं के वंशक्रम, देवासुर संग्राम तथा इन्द्र-वृत्र युद्ध सम्बन्धी प्रामाणिक जानकारी वर्णित है। राजा के अधिकार व कर्तव्य, राज्य की शासन व्यवस्था, संघ-शासन, राजतन्त्र तथा प्रजातन्त्र, राष्ट्र की कल्पना, राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, राजा का निर्वाचन, राज्याभिषेक, प्रजा के अधिकार तथा कर्तव्यादि विभिन्न राजनीति सम्बन्धी विषयों का भी इसमें विवरण किया गया है। कृषि, अन्न, कृषि के उपकरण, क्षेत्रों का माप, व्यापार, पशुपालन, जीविका के साधन आदि अनेक आर्थिक विषयों का भी ऋग्वेद में समावेश है। ऋग्वेद में दार्शनिक विवेचन भी पर्याप्त है। पुरुष-सूक्त तथा नासदीय- सूक्त में सृष्टि का उद्भव बतलाया गया है। इसमें ब्रह्म, ईश्वर, जीव, माया, एकेश्वरवाद, बहुदेववाद, पुनर्जन्म, मोक्ष आदि गहन विषयों पर भी विचार प्रस्तुत किये गये हैं। आख्यान एवं सम्वाद सूक्तों का साहित्यिक दृष्टि से अत्यन्त महत्त्व है। अतः अन्त में हम कह सकते हैं कि ऋग्वेद आर्य संस्कृति का विश्वकोश है। डॉ० जी०एस० सुकणकर का कथन वस्तुतः सत्य है— "Rgveda is the oldest record of the Aryans whose immediate descendants we are." (Ghata's Lectures on Rgveda) CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar