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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 167

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri द्वितीय अध्याय 139 ‘मित्रास्याहं चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे।’ (३६/१८) अर्थात् मैं मित्र की दृष्टि से समस्त प्राणियों को सम्यक देखूँ। वर्णाश्रम व्यवस्था के बारे में भी यजुर्वेद मन्त्रों में किंचित जानकारी दी गई है— ‘ब्राह्मणे॑ ब्राह्मणं क्षत्राय राजन्य मरुते वैश्य तपसे शूद्रम्।’ शुक्ल यजुर्वेद में सूर्य देव की भी अति मनोहर स्तुति की गई है— ‘आकृष्णेन रजसा वर्तमानोनिवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्येन सविता रथेनादेवो ययाति भुवनानि पश्यन्॥’ (अ.३३/ म०४३) अर्थात् हे मानवों! जो अपने ज्योतिःस्वरूप व रमणीय स्वरूप के आकर्षण से परस्पर सम्बद्ध लोक या मात्रा के साथ अपने भ्रमण की आवृत्ति करता हुआ, सब लोकों को दिखाता हुआ, प्रकाशमान सूर्यदेव, जल या अविनाशी आकाशादि और मरणधर्मा प्राणियों को अपने-अपने प्रदेश में स्थापित करता हुआ उदयास्त समय में आता जाता है वह ईश्वर-निर्मित सूर्यलोक है। यजुर्वेद में ओषधियों का भी सुन्दर निरूपण हुआ है। यथा— यत्रौषधीः॒ सम॒ग्म॑त राजा॑नः॒ समि॑ताविव। विप्रः॒ स उ॑च्यते भि॒षग्र॑क्षो॒हामी॑व॒चात॑नः॥ (यजु० १२/८०) अर्थात् हे मानवों! तुम लोग जिन स्थानों में सोमलतादि ओषधि होती हो, उनको जैसे राजधर्म से युक्त वीरपुरुष युद्ध में शत्रुओं को प्राप्त करते हैं, वैसे प्राप्त हो, जो दुष्ट लोगों का विनाशक रोगों को निवृत्त करने वाला बुद्धिमान वैद्य हो, वह तुम्हारे प्रति औषधियों के गुण का उपदेश करे और औषधियों का तथा उस वैद्य का सेवन करो। तथा या फलिनीः या अफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः। वृहस्पति प्रसूतास्ता नो मुञ्चत्वं हंसः॥ (अ०१२/म०८९) अर्थात् हे मानवों! जो अतिफलसम्पन्न, जो फलहीन, जो पुष्पहीन तथा जो अतिपुष्पसम्पन्न वेदवाणी के स्वामी ईश्वर से उत्पन्न की हुई औषधि से हम को दुःखदायी रोग से जैसे छुड़ावें, वे तुम लोगों को भी वैसे रोगों से छुड़ावें। अतः उपर्युक्त उत्कृष्ट विषय सामग्री के समावेश होने के कारण शुक्ल यजुर्वेद, कृष्ण यजुर्वेद की तुलना में श्रेष्ठ कहलाता है। CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar