भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 168

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 140 वैदिक वाङ्गमय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता यजुर्वेद की शाखाएँ - यजुर्वेद की शाखाओं की निश्चित संख्या के निर्धारण में विद्वानों में मतैक्य नहीं है। महाभाष्यकार पतञ्जलि ने 'एकशत यजुः' के द्वारा यजुर्वेद की १०१ शाखाओं का उल्लेख किया है। शौनक ने चरणव्यूह में यजुर्वेद की ८६ शाखाएँ बतलाई हैं। इस वेद की सूतसंहिता, ब्रह्माण्डपुराण तथा स्कन्दपुराण के अनुसार १०७ तथा मुक्तिकोपनिषद् के अनुसार १०९ शाखाएँ थीं। सम्प्रति यजुर्वेद की कुल ६ शाखाएँ प्राप्त होती हैं। कृष्ण यजुर्वेद की चार शाखाएँ इस प्रकार हैं- (१) तैत्तिरीय शाखा, (२) मैत्रायणी शाखा, (३) कठ शाखा, (४) कठ कपिष्ठल शाखा। शुक्ल यजुर्वेद की दो शाखाएँ उपलब्ध हैं- (१) वाजसनेयी शाखा (२) काण्व शाखा विषय विवेचन - शुक्ल यजुर्वेद को वाजसनेयी संहिता भी कहा जाता है। वाजसेनी के पुत्र याज्ञवल्क्य इसके द्रष्टा हैं, इसीलिए इसका शुक्ल यजुष्, यह नाम पड़ा। यह भी प्रचलित है कि वाजी का रूप धारण करके याज्ञवल्क्य को शुक्ल यजुष् की प्राप्ति वरदान रूप में हुई, अतः इसकी वाजसनेयी संहिता संज्ञा हुई। इस संहिता में कुल ४० अध्याय हैं जिनमें से अन्तिम १५ अध्याय खिलरूप से प्रसिद्ध हैं और इन्हें अवान्तरयुगीय माना जाता है। सम्पूर्ण यजुर्वेद में मुख्य रूप से कर्मकाण्ड का प्रतिपादन हुआ है अतः समस्त शाखाओं में विषयवस्तु प्रायः समान है। इसलिए वाजसनेयी संहिता के विषयों का विस्तृत विवेचन यहाँ प्रस्तुत है। यही विवेचन अन्य यजुर्वेदीय संहिताओं के विषयों के परिचयार्थ भी पर्याप्त है। वाजसनेयी संहिता के समस्त चालीस अध्यायों में विशाल यज्ञों के प्रार्थना सम्बन्धी मन्त्रों का संग्रह है। इनमें यज्ञों के महत्व तथा याज्ञिक-क्रियाओं के विषय में में सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध होती है। जिन प्रमुख यज्ञों का इसमें निरूपण है, उनके नाम निम्नलिखित हैं- (१) दर्शयज्ञ (२) पौर्णमास यज्ञ (३) चातुर्मास्ययज्ञ (४) सोमयाग (५) वाजपेययज्ञ (६) राजसूय यज्ञ (७) शतरुद्रीययज्ञ (८) सौत्रामणी यज्ञ (९) अश्वमेधयज्ञ (१०) पुरुषमेधयज्ञ (११) सर्वमेधयज्ञ (१२) पितृमेधयज्ञ (१३) प्रवर्ग्य यज्ञ आदि। CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar