वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri xiv सत्यज्ञान), दीक्षा, तप एवं ब्रह्मयज्ञ पृथिवी को धारण करते हैं:- सत्यं बृहदृतमुग्रदीक्षा तपो ब्रह्मयज्ञः। पृथिवीं धारयन्ति। (अथर्ववेद १२/१/१) वेदों के अनुसार राष्ट्रभावना के मूल आधार हैं- एकदेश (भौगोलिक एकता), एक केन्द्रीय शासन (संघटनात्मक एकता), एक संस्कृति (भावनात्मक एकता), एकसभ्यता (ऐतिहासिक एकता) और एक भाषा (अभिव्यक्ति की एकता), इन सभी का सुविस्तृत वर्णन वेदों में किया गया है। उक्तानुसार राष्ट्र, राष्ट्रीयएकता तथा राष्ट्र की संरक्षा के सन्दर्भित सूत्र वैदिकवाङ्मय में यत्र तत्र सर्वत्र उपलब्ध हैं, जिनका निरूपण एवं प्रकाशन भारत देश की वर्तमानकालिक परिस्थितियों में विशेष महत्त्व रखता है। आज के इस कठिन समय में प्रस्तुत यह बृहत्शोधकार्य निश्चय ही राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक एवं कल्याणकारी सिद्ध होगा। भारतीयों में परस्पर भ्रातृत्वभाव के प्रति निष्ठा बढ़ेगी तथा राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा। आश्चर्य है कि इस परिप्रेक्ष्य में ज्ञान-विज्ञान के आदिस्रोत वैदिकवाङ्मय का अनुशीलन अभी तक नहीं किया गया था, जबकि धर्म, नीति, आचार, शिक्षा, दर्शन तथा राष्ट्रसंरक्षकादि के मूल्यवान एवं लाभदायक घटकतत्त्व पर्याप्त मात्रा में हमारे वैदिक साहित्य में विद्यमान हैं, जो सर्वथा सार्वकालिक तथा सार्वभौमिक हैं, कालातीत तथा देशातीत हैं। तपःपूत, वैदिकमन्त्रद्रष्टा ऋषियों-मुनियों ने अपनी अमरवाणी द्वारा राष्ट्र, राष्ट्रधर्म तथा राष्ट्रीयएकता के साथ-साथ राष्ट्रीय-सर्वाङ्गीण-विकास हेतु आवश्यक, उसकी सुरक्षा के जो तात्कालिक एवं सार्वकालिक सूक्त प्रदान किये हैं, उन सभी का इस 'बृहद्शोधग्रन्थ के परिशीलन नामक तृतीय खण्ड के सातों अध्यायों में सुविस्तृत विवेचन किया गया है। सागर इव अपार-ज्ञान के भण्डार, वैदिक वाङ्मय की यह अनुपमयेता ही है कि वैदिक ऋषियों की दिव्य-दृष्टि, सहस्राब्दियों पूर्व उद्भूत होते हुए भी आज भी, उनके निर्देश व सन्देश प्रत्येक देश, प्रत्येक समाज, प्रत्येक परिवार व प्रत्येक व्यक्ति के लिए यथापूर्व ग्राह्य एवं लाभप्रद हैं। प्राचीनतम् वेद आज भी अर्वाचीन है- "THOUGH THE VEDAS ARE THE OLDEST, BUT THEIR MESSAGE IS ALWAYS LATEST." CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar