भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

पृष्ठ 19, कुल 353 में से

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पृष्ठ 19

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri xv अभीष्ट ग्रन्थ चार खण्डों तथा दश अध्यायों में विभक्त हैः- प्रथम खण्ड- परिप्रेक्ष्य (विषय प्रवेश) द्वितीय खण्ड- परिपार्श्व तृतीय खण्ड- परिशीलन चतुर्थ खण्ड- तुलनात्मक परिशीलन अन्तिम दशम अध्याय में उपसंहार दिया गया है। प्रस्तुत राष्ट्र-परक यह बृहत्ग्रन्थ, जो लगभग ३०० पृष्ठों में है, अत्यन्त संक्षेप में विषयानुक्रमानुसार निम्नवत् अवलोकनीय है :- १. परिप्रेक्ष्य नाम से ग्रन्थ के प्रथम खण्ड के प्रथम अध्याय में अभीष्ट शोध विषय का प्रारम्भ (प्रवेश) किया गया है, जिसमें राष्ट्र, राष्ट्र की संकल्पना व राष्ट्र का स्वरूप आदि को पाश्चात्य तथा भारतीय विशेषज्ञों के अनेक उद्धरणों द्वारा स्पष्ट किया गया है। वस्तुतः राष्ट्र के सुदृढ़ अस्तित्व का आधार राष्ट्रीयएकता ही होती हैं, और राष्ट्रीयएकता पर ही राष्ट्र की अखण्डता निर्भर करती है। इसीलिए नेहरू जी ने कहा था- मेरे जीवन का मुख्य कार्य भारत एकीकरण है। उनके कथन का तात्पर्य यह नहीं था कि भारत में एकता का अभाव है। हमारा स्वाधीनता-संग्राम एक ऐसा दृढ़ स्तम्भ था, जिसने राष्ट्रीयता (राष्ट्रीयएकता) के अङ्कुर को सींच-सींच कर बड़ा किया, तथा हमारे संविधान ने भी उसे बल प्रदान किया, कि- हम सब भारतवासी हैं, हम सब का एक ही संविधान है व एक ही राष्ट्रीय चिह्न है। २. परिपार्श्व नामक द्वितीय खण्ड तथा ग्रन्थ के द्वितीय अध्याय में वैदिकवाङ्मय का संक्षिस सर्वेक्षण किया गया है, जिसके अन्तर्गत 'वेद' का अर्थ, वेदों का महत्त्व, वेदों का कालनिरूपण एवं वेदों की शाखाएँ तथा ऋक्, यजुः, साम व अथर्ववेद- इन चारों संहिताओं तथा उनके ब्राह्मणों, आरण्यकों तथा उपनिषदों के साथ-साथ, गृह्यसूत्रों तथा धर्मसूत्रों का भी पूर्ण विवेचन तथा परिचय प्रदान किया गया है। ३. परिशीलन नाम का तृतीय खण्ड इस ग्रन्थ का सबसे बड़ा व सर्वप्रमुख अंश है। यही शोध विषय का मूलभाग है। वस्तुतः यह तृतीय खण्ड इस बृहत्ग्रन्थ का 'हृदय' है, केन्द्र बिन्दु है। यह तृतीय अध्याय से लेकर अष्टम अध्याय तक, अर्थात् छः अध्यायों में विस्तृत है। राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के परिप्रेक्ष्य में ऋग्वेद का समीक्षात्मक अनुशीलन तृतीय अध्याय में, यजुर्वेद का चतुर्थ अध्याय में, सामवेद का पञ्चम अध्याय में तथा CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar