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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 20

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xvi अथर्ववेद का षष्ठ अध्याय में किया गया है। इसी प्रकार, ब्राह्मणों, आरण्यकों तथा उपनिषदों का एवं गृह्यसूत्रों व धर्मसूत्रों का अनुशीलन क्रमशः सप्तम व अष्टम- इन दो अध्यायों में किया गया है। हमें गृह्यसूत्रों और धर्मसूत्रों के भी आधारतत्त्व वैदिक-ग्रन्थों से ही प्राप्त होते हैं। इन्हीं के अनुसार धर्मयुक्त समाज एवं समाज के सदस्यों का धर्मयुक्त आचरण ही राष्ट्र की उन्नति में सहायक होता है। धर्म की कसौटी पर खरा उतरने वाला राजा ही राष्ट्र की एकता व अखण्डता की रक्षा में सक्षम होता है, इसीलिए अथर्ववेद में लिखा है- त्वां विशो वृणुतां राज्यायत्वामिमाः प्रदिशः पञ्च देवीः। अर्थात् राजा का चयन प्रजा द्वारा किया जाए। ये पाँच दिव्य दिशाएँ भी तुम्हें (राजा को) स्वीकार करें। राष्ट्र के उत्कृष्ट पद पर तुम आसीन रहो। राजन्! सदैव राष्ट्र की रक्षा के प्रति सचेत रहो। इस प्रकार प्राचीन वाङ्मय में राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के प्रति सम्पूर्ण दायित्व प्रजा का ही नहीं था, उसमें प्रथम भूमिका राज की ही होती थी। यथा अथर्ववेद में वर्णित है- ब्रह्मचर्येण तपसा राजा राष्ट्रं विरक्षति। (अथर्ववेद ११/५/१७) (ब्रह्मचर्य एवं तपस्या का पालन करने वाला राजा ही राष्ट्र की रक्षा कर सकता है)। ४. उल्लिखित तृतीय खण्ड के बाद इस ग्रन्थ के चतुर्थ एवं अन्तिम खण्ड के नवम अध्याय में राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के सम्बन्ध में प्राचीन तथा अर्वाचीन विचारों का तुलनात्मक अनुशीलन किया गया है। यद्यपि भारत की अनेकता में एकता का होना विस्मयकारी है, तथापि भारत एक राष्ट्र है। इसका प्रतीक है हमारी तीनों सेनाएँ। जिनमें सभी प्रदेशों, जातियों के लोग मिलकर एक राष्ट्र की सुरक्षा में दिन-रात सीमा पर चौकन्ने रहते हैं। वे सब अपने को भारतीय ही मानते हैं, इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं। सर्वपल्ली राधाकृष्णन् ने भी व्यक्त किया है- हमारी राष्ट्रीयएकता व अखण्डता की नींवें खोखली नहीं हैं, बल्कि वटवृक्ष की तरह अन्दर मीलों तक गहराई तक फैली हुई हैं। वह वैदिक काल से ही उस ज़मीन की तह में समाई हुई हैं। यह एकता एक स्थायी-भावना है, जो पावन-भूमि पर जन्म लेते ही मानव के मन में समाहित हो जाती है। इसी राष्ट्रीयएकता व अखण्डता पर सम्पूर्ण राष्ट्र को गर्व

CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar