वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 183, कुल 353 में से
संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri द्वितीय अध्याय 155 ऋग्वेद की ऋचाएँ १५०४ + पुनरुक्त २६७ = कुल १७७१ नवीन ऋचाएँ ९९ + पुनरुक्त ५ = कुल १०४ सामवेद की कुल ऋचाएँ = १८७५ पूर्वार्चिक में ऋचाओं की रचना कतिपय छन्दों के आधार पर कतिपय देवताओं के आधार पर होती है, जबकि उत्तरार्चिक में गीतों की रचना प्रमुख यज्ञों के आधार पर की गई है। वस्तुतः उत्तरार्चिक पूर्वार्चिक की एक महत्त्वपूर्ण पूर्ति है। उत्तरार्चिक में जो तीन-चार ऋचाओं के सूक्त हैं, उनमें से अधिकांश की प्रारम्भिक ऋचाएँ पूर्वार्चिक में उपलब्ध होती हैं। शाखाएँ- पतञ्जलि ने सामवेद की एक हजार शाखाएँ बतलाई हैं। शौनक के भी 'चरण व्यूह' में सामवेद की एक हजार शाखाएँ हैं, किन्तु चरणव्यूह के टीकाकार 'महीदास' सामवेद की कुल तीन शाखाओं की उपलब्धि की सूचना देते हैं— १. कोथुमीय शाखा। २. राणायनीय शाखा। ३. जैमिनीय शाखा। कौथुमीय शाखा गुर्जर देश में, राणायनीय शाखा महाराष्ट्र में तथा जैमिनीय शाखा कर्नाटक प्रदेश में अधिक प्रसिद्ध है। विषय विवेचन :- पूर्वार्चिक के पाँच भागों में प्रथम भाग 'आग्नेय काण्ड' में अग्नि आगे ले जाने वाला है। इसमें अग्नि विषयक मन्त्रों का समवाय उपस्थित किया गया है। दूसरा काण्ड 'ऐन्द्र काण्ड' है। यह द्वितीय से लेकर चतुर्थ अध्याय तक फैला है। इसमें इन्द्र की स्तुति सम्बन्धी मन्त्रों का संग्रह है। इन्द्र सर्वाधिक शक्तिशाली देव के रूप में वर्णित है। उससे अधिक शक्ति सम्पन्न हो जाने का तो प्रश्न ही नहीं है। वह अभिञ्जु है, वजबाहु है, सब उसके नियन्त्रण में रहते हैं। वह अपने बल द्वारा पर्वतों को कँपा देता है, जिससे पृथ्वी में भूकम्प आ जाता है। सामवेद के अनुसार 'शस्त्रेण रक्षिते राष्ट्रे शास्त्रचिन्ता प्रवर्तते' अर्थात् शास्त्र से रक्षित राष्ट्र में शास्त्रचिन्ता प्रवृत्त होती है। सम्राट को ऐसा होना चाहिए जिसका शासन प्रजा की रक्षा कर सके। सामवेदानुसार पीड़ित व्यक्ति की रक्षा आवश्यक है, अगर शासन इसमें समर्थ नहीं है तो यह पाप है। ऐन्द्र-काण्ड- अग्नि के अग्रनयन का मार्ग प्रशस्त करता है। समस्त साधक अग्नि से प्रार्थना करते हैं- CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar