वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 189, कुल 353 में से
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द्वितीय अध्याय 161 हमारे हृदय की वीणा के तारों को झंकृत करते हैं, तो दूसरी ओर साम-संहिता के प्रार्थना मन्त्रों का संग्रह भक्ति रूपी गंगा में स्नान का आनन्द प्रदान करता है। सामवेद में सोम विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, तथा दार्शनिक दृष्टि से यह सोम शिवतत्त्व के रूप में स्वीकृत है। अतः सामसंहिता संगीत एवं भक्ति के माध्यम से शिव तत्त्व की प्राप्ति का साधन है। शतपथ-ब्राह्मण में तो सामवेद तथा सामगान के महत्त्व के विषय में यहाँ तक लिखा है कि "न असाम यज्ञो भवति। नवा अहिंकृत्य सामगीयते।" अर्थात् कोई भी यज्ञ सामगान के बिना पूर्ण नहीं होता है तथा सामगान भी हिंकार के बिना सम्भव नहीं। इससे सामवेद तथा उसके सामगान का महत्त्व स्पष्ट हो जाता है।
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar