वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 190, कुल 353 में से
संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 162 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता अथर्ववेद अपनी विशिष्ट विषयसामग्री के कारण अथर्ववेद चतुर्वेदों में अन्यतम है। अथर्ववेद के महत्त्व के अनेक कारण हैं। वेदत्रयी आमुष्मिक फलप्रद हैं, परन्तु अथर्ववेद ऐहिक तथा आमुष्मिक अर्थात् परलोक सम्बन्धी फलों का प्रदाता है। इस ऐहिक जीवन में मनुष्य अपने जीवन को आनन्दमय बनाना चाहता है, इस कार्य के लिए अनेक साधनों की आवश्यकता होती है। उन साधनों को प्राप्त करने के लिए नाना प्रकार के अनुष्ठान किए जाते हैं। उन अनुष्ठानों का विस्तृत विवेचन इस वेद में उपलब्ध होता है। इस विषय में आचार्य सायण का कथन प्रस्तुत है— व्याख्याय वेदत्रितयमामुष्कि फलप्रदम्। ऐहिकामुष्मिक फलं चतुर्थ व्याचिकीर्षति॥ यज्ञ चार पुरोहितों द्वारा सम्पादित होता है— श्रोता, अध्वर्यु, उद्गाता तथा ब्रह्मा। इनमें से चतुर्थ पुरोहित (ब्रह्मा) का साक्षात् सम्बन्ध इसी वेद से है। सर्वकर्माभिज्ञ होने के कारण ब्रह्मा यज्ञ का अध्यक्ष होता है। वह शेष तीन पुरोहितों द्वारा होने वाली यज्ञ सम्बन्धी त्रुटियों का निराकरण भी करता है। चतुर्वेद का ज्ञाता होते हुए भी उसका मुख्य वेद अथर्ववेद ही है। गोपथ-ब्राह्मण के अनुसार वेदत्रयी द्वारा सम्पादित यज्ञ में यज्ञ का एक पक्षीय संस्कार हो पाता है। ब्रह्मा ही मन के द्वारा यज्ञ के द्वितीय पक्ष का संस्कार करता है— स वा एष त्रिभिर्वेदैर्यज्ञस्यान्तरः पक्षः संस्क्रियते। मनसैव ब्रह्मा यज्ञस्यान्यतरं पक्षं संस्करोति॥ (गो०ब्रा० ३।१२) ऐतरेय ब्राह्मण ने भी इस विषय का समर्थन किया है— 'अयं वैयज्ञो योऽयं पवेतः। तस्य वाक् च मनश्च वर्तन्यौ। वाचा चहि मनसा च यज्ञोऽवर्तत। इयं वै वाम्। अदोमनः। तद्वाचा त्रय्या विद्यैकं पक्षम्, संस्कुर्वन्ति मनसैव ब्रह्मा संस्करोति।।' (ऐत०ब्रा० ५/३३) अर्थात् स्वयं अथर्ववेद के परिशिष्ट में कहा गया है कि जिस राजा के राज्य में अथर्ववेद का विद्वान् रहता है, वह राष्ट्र विघ्नरहित होकर निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है— यस्य राज्ञो जनपदे अथर्वा शान्तिपारगः। निवसत्यपि तद् राष्ट्रं वर्धते निरूपद्रवम्॥ CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar