भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

पृष्ठ 197, कुल 353 में से

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पृष्ठ 197

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri द्वितीय अध्याय 169 अर्थात् कश्यप के वेदज्ञान से, आश्रय से, ज्योति से और प्रताप से मैं ढका हूँ। जो दैवी वाण हैं, वे मुझको न पहुँचे और मानुषी छोड़े हुए (वाण) मारने के लिए न पहुँचे। पौष्टिक सूक्त :- पौष्टिक सूक्तों में ऐसे मन्त्र उपलब्ध होते हैं जिनमें विभिन्न वर्गों के लोग अपनी समृद्धि के लिए परमात्मा से प्रार्थना करते हैं। इन सूक्तों में गृहस्थ जन गृह निर्माण के लिए, कृषक वर्ग हल जोतने के लिए, बीज बोने के लिए, शस्य की समृद्धि के लिए परमात्मा की उपासना करते हैं। इन्हीं मन्त्रों के द्वारा समाज, व्यवसायी तथा श्रमिक वर्ग अपनी-अपनी महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति की आशा करता है। इन्हें आशीर्वचन की संज्ञा से विभूषित किया जा सकता है। वन्य पशुओं से गायों की रक्षा तथा चोरादि सामाजिक अपराधियों से धन-धान्य की रक्षा हेतु मन्त्र संकलित है। इन मन्त्रों में अनेक मन्त्र ऐसे भी मिलते हैं जिनमें उच्च कोटि का साहित्य उपलब्ध होता है। इन मन्त्रों में कल्पना की उर्वरता, विचारों की नवीनता, विन्यास की मञ्जुलता तथा अलंकारों की रमणीयता दर्शनीय है। निम्नलिखित मन्त्र दृष्टि-सूक्त से उद्धृत है। इसमें वृष्टि का अत्यन्त आकर्षक, सरस तथा स्वाभाविक वर्णन प्राप्त होता है- अ॒भि क्र॑न्द स्तन॒यार्द॑योद॒धिं भूमिं॑ पर्जन्य॒ पय॑सा सम॒ङ्ग्धि। त्वया॑ सृ॒ष्टं ब॑हु॒लमैटु॑ वृ॒र्षमाशा॑रे॒षी कृ॒शगु॒रैत्वस्त॑म्॥ (अथर्व० ४/१५/६) अर्थात् हे मेघ ! तू सभी ओर गर्जन कर, गड़गड़ा, समुद्र को हिला दे, भूमि को जल से भर दे। तेरे द्वारा भेजा हुआ वृष्टि जल आवें। अधिक पदार्थ लाने वाला, शरण चाहने वाला, दुर्बल गाय तथा बैलों वाला किसान स्वगृह की ओर प्रस्थान करे। शृङ्गार सूक्त :- अथर्ववेद में ऐसे मन्त्रों का भी एक विशाल संग्रह प्राप्त हैं जिनमें जीवन की प्रसन्नता तथा भय से सुरक्षा आदि के लिए प्रार्थनाएँ की गई हैं, इन्हें शृङ्गार सूक्त के नाम से पुकारा जाता है। इन सूक्तों का एक नाम और भी है- प्रसाद सूक्त। इनमें भूतों इत्यादि से रक्षा के लिए मंत्र मिलते हैं। इस प्रकार के मन्त्रों का प्राप्तिस्थल प्रधानतः चौथे काण्ड के अन्तर्गत निहित २३वें सूक्त से २९वें सूक्त तक हैं। इस प्रकार ये कुल सात सूक्त हैं। इन समस्त सूक्तों में से हर एक सूक्त सात ऋचाओं वाला है। इन सूक्तों में जिनके प्रति सम्बोधन किया गया है, वे देव क्रमशः इस प्रकार हैं- अग्नि, इन्द्र, वायु, सविता, स्वर्गमरूत, भव तथा शर्व, मित्र एवं वरुण। इन सूक्तों का प्रत्येक मन्त्र कष्ट निवारणार्थ की जाने वाली प्रार्थना के रूप में है- CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar