वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 199, कुल 353 में से
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द्वितीय अध्याय 171 (अ) अभिचार मन्त्र (ब) वशीकरण मन्त्र (स) घृणास्पद मन्त्र इन उपर्युक्त तीनों प्रकार के मन्त्रों का क्रमशः विवेचन निम्नलिखित है- (अ) अभिचार मन्त्र :- यह 'अभिचार मन्त्र' ऐसे मन्त्रों का समूह है जिन मन्त्रों को वन्य भयानक जानवरों तथा भूत-प्रेत के निवारणार्थ प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के मन्त्रों में प्रेम में व्यभिचार तथा वैवाहिक जीवन के विघ्नों का प्रकटीकरण हुआ है। इन मन्त्रों के प्रयोग से पति द्वारा तिरस्कृत पत्नी पुनः पति-प्रिय बन सकती है। इस प्रकार अथर्ववेद की एक ऋचा में प्रेमी द्वारा अपनी प्रेमिका को चुराने की कामना की गई है- स्वप्तु॑ मा॒ता स्वप्तु॑ पि॒ता स्वप्तु॒ श्वा स्वप्तु॑ वि॒श्पति॑ः। स्वप॑न्त्वस्यै॑ ज्ञा॒तयः॒ स्वप्न्व॒यम॒भितो॒ जन॑ः॥ (अथर्व० ४/५/६) अर्थात् इसके लिए माता सोवे, पिता सोवे, कुत्ता सोवे, गृह के सभी ज्येष्ठ लोग सो जाय, प्रेमिका के सम्बन्धी सोवें तथा यह सब जन चारों ओर सोवें। कतिपय विद्वानों का विचार है कि इस प्रकार के मन्त्र वस्तुतः गहन निद्रा में मग्न होने की कामना से कहे जाते हैं, क्योंकि इनमें सभी के सोने तथा सुलाने की बात कही गयी है- प्रो॒ष्ठे॒श॒यास्त॑ल्पे॒शया नारी॒र्या व॑ह्य॒शीव॑रीः। स्त्रियो॒ याः पुण्य॑गन्ध॒युस्ताः सर्वाः स्वापयामसि॥ (अथर्व० ४/५/३) अर्थात् बड़े आँगन में सोने वाली, खाटों पर सोने वाली और हिंडौला आदि में सोने वाली जो नारियाँ हैं और जो पुण्य गन्ध वाली स्त्रियाँ हैं, उन सबको हम सुलाते हैं। इस प्रकार के मन्त्रों में कुछ ऐसे भी हैं जिनमें कोई प्रेमी अपनी प्रियतमा के न चाहने पर भी उसे अपने प्रति कामासक्त कर सकता है। ये मन्त्र दूसरों के लिए हानिकारक नहीं होते। (ब) वशीकरण मन्त्र :- इसके अन्तर्गत वे मन्त्र आते हैं जिनके पाठ के द्वारा कोई भी युवक गर्व के मद में चूर स्त्री को भी अपने वश में कर सकता है। इस क्रिया में सर्वप्रथम प्रेमी अपनी इच्छित प्रेमिका की एक मिट्टी की मूर्ति बनाता है, उसके बाद सन की डोरी वाले धनुष को ग्रहण कर एक विशिष्ट बाण के द्वारा प्रेमिका की
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar