वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 210, कुल 353 में से
संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri तृतीय खण्ड – परिशीलन तृतीय अध्याय ऋग्वेद में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता का अनुशीलन १. ऋग्वेद में निरूपित राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता के आधारतत्त्व : वेद, सत्य ज्ञान की अप्रतिम-राशि एवं विश्व के पुस्तकालय में प्राचीनतम ग्रंथ है। इसमें वर्णित सब कुछ जो भूत में वर्णित माना जाय तो वही आज के सन्दर्भ में भी नवीनतम ही दिखलाई देता है। उसमें समस्त त्रिकाल-सत्य सिद्धान्तों का समावेश है। अर्थात् उनमें जो कुछ लिखा है– वह भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों काल में शाश्वत सत्य समझा जा सकता है। मानव जीवन का आदर्श रूप में निर्वाह करने के लिये उनमें समस्त सिद्धान्तों का बीज रूप में समावेश है। सृष्टि के आरम्भिक युग में ही मानव समाज ने एक सुसंगठित समाज की आवश्यकता अनुभव की थी और जनसंख्या की वृद्धि के साथ ही समाजों में भी वृद्धि हुई और कालान्तर में मानव स्वभाव में विद्यमान स्वभावविभिन्नता ने उन्हें पृथक्- पृथक् समूहों में रहने पर विवश कर दिया और यहीं से आरम्भ हुई पृथक्-पृथक् राष्ट्रों के निर्माण की प्रक्रिया। इन राष्ट्रों की अपनी अलग-अलग सभ्यता और संस्कृति होती है। ऋग्वेद में राजनीति से सम्बन्धित अनेक महत्त्वपूर्ण तथ्यों को सम्यक् रूप से उद्घाटित किया गया है। इस वेद में राजनीति के मानवीय मूल्यों एवं राष्ट्रीयचेतना के सार्वभौम स्वरूप का सम्यक् विश्लेषण किया गया है। सम्पूर्ण मानवजाति को एक ही ईश्वर की सन्तान के रूप में परिभाषित किया गया है और उससे अपने सन्तानों की अच्छी प्रकार से पालन-पोषण की याचना की गई है– स न॑ः पि॒तेव॑ सून॒वेऽग्ने॑ सू॒पाय॒नो भ॑व। सच॑स्वा नः स्व॒स्तये॑।।१ अर्थात् मनुष्यों को ईश्वर से याचना करते हुए अपने अर्थात् मानवजाति के लिए इस प्रकार कहना चाहिए– हे ईश्वर! जैसे पिता अपने पुत्रों को श्रेष्ठ मानव का स्वरूप देने के लिए उत्तम शिक्षा देकर और समुचित प्रकार के संस्कार देकर उनको सद्गुणों से युक्त बनाकर श्रेष्ठ कार्यों को सम्पन्न करने योग्य बना देता है, वैसे ही आप हम लोगों को शुभ गुणों से युक्त, शुभ कर्मों को करने की प्रेरणा दीजिये। १. ऋग्वेद १/१/९ CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar