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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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204 वैदिक वाङ्ग्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता

अर्थात् हे मनुष्यों! जिस उत्तम बुद्धि और सत्य आचरण से विद्यावानों का देखने योग्य स्वरूप धारण किया जाता है और उनका कार्य भी सिद्ध किया जाता है, उस वाणी और उस सत्य आचार को तुम नित्य स्वीकार करों। शिक्षा दर्शन :- ऋग्वेद में शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को वास्तविक अर्थ में शिक्षित करके ज्ञान प्रदान करना है। जन्म के पश्चात् वह शिक्षा ग्रहण करने का अधिकारी हो जाता है। विद्या ग्रहण करने के लिए विद्यार्थी का ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य बतलाया गया है। क्योंकि वेद शास्त्रों का ज्ञान आज जैसी पुस्तकें रटने और परीक्षा पास कर लेने मात्र का नाम नहीं था। इस शिक्षा का अर्थ उसे ग्रहण करके उसको अपने जीवन में ही लागू करना होता था। सं नु वो॑चावहै॒ पुनर्य॒तो॑ मे॒ मध्वाभृ॑तम्। होते॑व॒ क्षद॑से प्र॒यम्॥२ अर्थात् जैसे यज्ञ करने वाले एवं कराने वाले प्रीति के साथ मिलकर यज्ञ को सिद्ध कर पूर्ण करते हैं वैसे ही गुरु-शिष्य मिलकर सब विद्याओं का प्रकाश करें। सब मनुष्यों को इस बात की इच्छा निरन्तर रखनी चाहिए कि जिससे हमारी विद्या की वृद्धि प्रतिदिन होती रहे। मधु॒ वाता॑ ऋताय॒ते मधु॑ क्षरन्ति॒ सिन्ध॑वः। माध्वी॑र्नः स॒न्त्वोष॑धीः॥३ अर्थात् हे पढ़ाने वाले विद्वानों! शिक्षकों! तुम और हम मिलकर ऐसा यत्न करें कि जिससे सृष्टि के पदार्थों से समग्र आनन्द के लिये विद्या से उपकारों को ग्रहण कर सकें। मनुष्यों का सदैव यह प्रयास होना चाहिये कि वे अच्छी वैज्ञानिक पद्धति से शिक्षा ग्रहण करके देश व राष्ट्र की उन्नति के लिये अत्याधुनिक विमानों और अस्त्र- शस्त्रों का निर्माण करने में सफलता प्राप्त करें जिससे कि शत्रुओं का सामना कुशलतापूर्वक किया जा सके। एना॒ङ्गू॒षेण॑ वय॒मिन्द्र॑वन्तो॒ऽभि ष्या॑म वृ॒जने॒ सर्व॑वीराः। तन्नो॑ मि॒त्रो वरु॑णो मामहन्ता॒मदि॑तिः सिन्धु॑ः पृथि॒वी उत द्यौः॥१९॥४ अर्थात् "मनुष्यों को चाहिए कि जिसके पढ़ाने से विद्या और अच्छी शिक्षा बढ़ें,


१. ऋग्वेद १/१४१/१ २. ऋग्वेद १/२५/१७ ३. ऋग्वेद १/९०/६ ४. ऋग्वेद १/१०५/१९

CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar