वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 246, कुल 353 में से
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218 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता राज्य में निवास करने वाले सभी प्राणी-प्रजाजनों में समाहित किये जाते हैं। सभी के लिए यह नियम लागू होता है कि वे राज्य के उत्थान में अपना सहयोग प्रदान करें। भूर्भुव॒: स्व॒: सु॒प्रजा॒: प्र॒जाभि॑: स्या॒ं सु॒वीरो॑ वी॒रै: सु॒पोष॒: पोषै॑:। नर्य॑ प्र॒जां मे॑ पाहि॒ शंस्य॑ प॒शून्मे॑ पा॒ह्यथ॑र्य्य पि॒तुं मे॑ पाहि॥१ अर्थात् "मनुष्यों को ईश्वर की उपासना व उसकी आज्ञा के पालन का आश्रय लेकर, उत्तम नियमों से व उत्तम प्रजा, शूरता, पुष्टि आदि कारणों से प्रजा-पालन करके निरन्तर सुखों को सिद्ध करना चाहिये।" राज्य के न्याय-कार्य में स्त्री की सहभागिता को पूर्ण रूप से स्वीकार किया गया है। स्त्री और पुरुष होने का भेद वैदिक काल में कहीं भी प्राप्त नहीं हुआ है। राजा राजकर्म में अपनी रानी से पूर्ण सहयोग प्राप्त कर सकता है। स्त्री व पुरुष दोनों में ही समान शिक्षा और विद्वता प्राप्त होती थी। राज्य सभा में होने वाले न्याय में भी यजुर्वेद के अनुसार स्त्री की सहभागिता होना अनिवार्य माना गया है। ध्रु॒वाऽसि॑ धरु॒णाऽऽस्तृता वि॒श्वक॑र्मणा। मा त्वा॑ समु॒द्र उद्व॑धीन्मा सु॑प॒र्णोऽव्यथ॑माना पृथि॒वीं दृं॑ह ॥२ अर्थात् “जैसी राजनीति-विद्या को राजा ने पढ़ा हो, वैसी ही उसकी रानी भी पढ़ी होनी चाहिये। सदैव दोनों परस्पर पतिव्रता-स्त्रीव्रत होकर न्याय से पालन करें। व्यभिचार और काम की व्यथा से रहित होकर धर्मानुकूल पुत्रों को उत्पन्न करके स्त्रियों को स्त्री-रानी और पुरुषों को पुरुष-राजा न्याय करें।" प्र॒जाप॑तिष्ट्वा सादयत्व॒पां पृष्ठे समु॒द्रस्येम॑न्। व्यच॑स्वतीं प्रथ॑स्वतीं॒ प्रथ॑स्व पृथि॒व्यसि॑॥३ अर्थात् राजपुरुष को चाहिए कि वे जिस-जिस राजकार्य में प्रवृत्त हों, उस-उस कार्य में अपनी-अपनी स्त्रियों को भी स्थापित करें, जो राजपुरुष जिन पुरुषों का न्याय करें उसकी स्त्री का न्याय रानी किया करें। यजुर्वेद के सम्पूर्ण राजधर्म एवं दर्शन पर दृष्टिपात करें तो यह ज्ञात होता है कि राज्य या राष्ट्र के आदर्श होने की संकल्पना तो आरम्भ से ही प्रस्तुत हो गई थी। कहीं १. यजुर्वेद ३/३७ २. यजुर्वेद १३/१६ ३. यजुर्वेद १३/१७
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar