भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

पृष्ठ 256, कुल 353 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 256

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 228 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता उनकी सीधी भागीदारी भी उनको राष्ट्र से प्रत्यक्ष तौर पर जोड़ती है। उन्हें अपनी महत्ता का स्वयं ज्ञान होता है। यजुर्वेद में उल्लिखित (३४/९४) मंत्र में वर्णित है कि “जो मनुष्य एक दूसरे के लिए सुख देवें, जो मिलकर दुष्टों का वध करें, वे पुत्र-पौत्र वाले होकर भी मनुष्यों के सुख की उन्नति में समर्थ-विद्वान् होने योग्य होते हैं।” इसमें दुष्टों से आशय देश की एकता एवं अखण्डता पर आघात करने वालों को माना जा सकता है क्योंकि दुष्ट-प्रवृत्ति के लोग ही देश के आन्तरिक वातावरण को बिगाड़ने के लिए आतंक फैलाने वाली क्रियाएँ करते हैं। अतः ऐसे लोगों के दमन का पूर्ण उल्लेख है। देश में ऐसे लोगों को मान्यता प्रदान की गई है जो एक दूसरे के लिए सुखकारी प्रमाणित हो सकें। प्राचीन काल से ही भारत एक विस्तृत एवं महान् राष्ट्र के रूप में माना जाता रहा है और इसकी सभ्यता एवं संस्कृति इस बात का प्रतीक है कि विदेशों से आये लोगों को भी मित्रवत् स्वीकार किया जाता रहा है। किसी अन्य राष्ट्र की स्वतंत्रता या अखण्डता का हनन करने का प्रयास कभी नहीं किया गया और न ही अपनी राष्ट्रीय एकता और अखण्डता पर प्रहार करने वालों को क्षमा किया गया। CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar