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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 269

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri पञ्चम अध्याय 241 होती है। दुष्ट, पापियों और अनाचारियों के मर्दन का सदैव वर्णन मिला है। वे व्यक्ति जो मानव, समाज और राष्ट्र के लिए घातक हों, उन्हें पापी और अनाचारी के अतिरिक्त क्या कहा जा सकता है। ऐसे व्यक्तियों से ही देश और समाज को हानि हो सकती है। इससे यह स्पष्ट है कि सामवेद में धर्मदर्शन द्वारा एकता और अखण्डता के लिए भी समुचित वातावरण प्रस्तुत किया गया है। ५. राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता के परिप्रेक्ष्य में सामवेद के आचार- दर्शन, शिक्षा-दर्शन एवम् अर्थ-दर्शन का अनुशीलन- मनुष्य के आचार-विचारों की शुद्धता से ही सम्पूर्ण व्यक्तित्व के बारे में आकलन किया जा सकता है। नैतिकता का जीवन में समावेश ही उसके जीवन को मानवीय बनाता है। नीति के अनुसार आचार-विचार का अनुकरण करने वाले समाज से एक आदर्श समाज एवं राष्ट्र का निर्माण होता है। एक आदर्श समाज से ही एकता सूत्र में आबद्ध राष्ट्र तैयार होता है। नीति में अपनी अदृश्य शक्ति होती है जो मानव को आत्मिक बल प्रदान करती है। अग्निमिन्धानो मनसा धियꣳ सचेत मर्त्यः। अग्निमिन्धे विवस्वभिः॥१ अर्थात् "मनुष्यों को चाहिए कि वह योग की अग्नि को प्रदीप्त करता हुआ मन के साथ बुद्धि को संयुक्त करे और ज्ञान-ज्योतियों से अपने अन्दर परमेश्वर को प्रकाशित करे।" न कि देवा इनीमसि न क्या योपयामसि। मन्त्रश्रुत्यं चरामसि॥२ अर्थात् हे विद्वान् पुरुषों! हम न तो किसी की हिंसा करते हैं और न किसी को पथभ्रष्ट ही करते हैं, अपितु जैसा वेद कहता है उसी के अनुसार आचरण करते हैं। यही कारण है कि वेदों में सूक्ष्म से सूक्ष्म और बृहत् से बृहत् विषय को स्पष्ट रूप से वर्णित किया गया है, चाहे वह देवों से सम्बन्धित आचार व्यवहार हो या माता-पिता, पति-पत्नी, भृत्यादि के साथ किया गया व्यवहार। मा चिदन्यद्वि शꣳसत सखायो मा रिषण्यत। इन्द्रमित्स्तोता वृषणꣳ सचा सुते मुहुरुक्था च शꣳसत॥३ अर्थात् हे मित्र! सत्य के विपरीत मत बोलो। किसी को दुःख मत दो, कामनाओं १. सामवेद भाषाभाष्ये- पूर्वार्चिक: १/१९ २. सामवेद भाषाभाष्ये- पूर्वार्चिक: २/१७६ ३. सामवेद भाषाभाष्ये- पूर्वार्चिक: ३/२४२ CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar