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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 283

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षष्ठ अध्याय 255 अर्थात् "हे वीर पुरुषों! अपने शस्त्रों को उठाओं और राक्षसी-प्रवृत्ति वाले दुष्ट पुरुष को मार भगाओं। इस नारी को पुण्य कार्य या पुण्य पुरुष के हाथ धारण कराओं। ज्ञानवान्, बुद्धिमान्, विधाता, पिता इसके योग्य पति को खोज कर प्राप्त करें। ऐश्वर्यवान् चित्त को अनुरंजन करने में समर्थ ज्ञानी पुरुष कन्या का पाणिग्रहण करने के लिए आगे आयें।" इस प्रकार अयोग्य वर को कन्या प्रदान करने के लिए विधान न था। कन्यायें भी विदुषी होती थी और उपयुक्त योग्य वर की अपेक्षा भी रखती थी। अथर्ववेद में विधवा विवाह का उल्लेख भी प्राप्त होता है। कहा गया है कि जब स्त्री एक पति के पश्चात् दूसरे पति को प्राप्त होती है और वे दोनों पञ्चौदन अग्नि में डालते हैं, तो उनका वियोग नहीं होता। यदि दूसरा पति अग्नि में अन्न पञ्चौदन डालता है, तो वह अपनी पुनर्विवाहिता पत्नी के साथ समान लोक में रहता है- या पू॒र्वं पतिं॑ वित्त्वाथा॒न्यं वि॒न्दतेऽप॑रम्। पञ्चौ॑दनं च॒ ताव॒जं ददा॑तो॒ न वि यौ॑षतः॥ स॒मा॒नलो॑को भवति पु॒नर्भुवाप॑रः॒ पति॑ः। यो॒ऽजं पञ्चौ॑दनं दक्षि॑णाज्योति॒षं ददा॑ति॥१ इन उल्लेखों से विधवा विवाह की स्थिति स्पष्ट हो जाती है। ३. राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के परिप्रेक्ष्य में अथर्ववेद के राजदर्शन का अनुशीलन : राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के परिप्रेक्ष्य में राजदर्शन महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि राजनीतिक व्यवस्था से ही राष्ट्रीय एकता और अखण्डता का सीधा सम्बन्ध स्थापित होता है। योग्य राजा और चरित्रवान् तथा धर्मपरायण प्रजा ही किसी राष्ट्र की सम्पत्ति होती है। राजा का निर्वाचन उसके गुणों और वीरता के अनुसार ही किया जाता था। अथर्ववेद में सूक्त (७/८७-८८) ही राजा के निर्वाचन के लिए प्रयुक्त हुआ है। इस मंत्र में राजपद के निर्माण की स्पष्ट घोषणा की गई है- ध्रु॒वोऽच्यु॑तः॒ प्र मृ॑णीहि॒ शत्रूं॒ञ्छत्रूय॒तोऽध॑रान् पादयस्व। सर्वा॒ दिशः॒ संम॑नसः स॒ध्रीची॑र्ध्रु॒वाय॑ ते॒ समि॑तिः कल्पतामि॒ह॥२


१. अथर्ववेद ९/५/२७-२८ २. अथर्ववेद ६/८८/३

CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar