वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 284, कुल 353 में से
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256 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता अपने कर्तव्य से च्युत हो जाने पर राजा को उसके पद से च्युत कर दिया जाता था और अपने दोषों की स्वीकारोक्ति के पश्चात् उसे पुनः राजा चुन लिया जाता था। इस पुनःस्थापना तथा प्रजा द्वारा संवरण का उल्लेख अथर्ववेद के दो सूक्तों में (३/३; ३/४) में विशद रूप से किया गया है। विश् के द्वारा संवरण का निर्देश यह मंत्र स्पष्ट करता है— त्वां विशो॑ वृणतां राज्या॒य त्वामि॒माः प्र॒दिशः॒ पञ्च॑ दे॒वीः। वर्ष्म॑न् राष्ट्रस्य॑ क॒कुदि॑ श्रयस्व॒ ततो॑ न उ॒ग्रो वि भ॑जा॒ वसू॑नि॥१ श्रेष्ठ राजा भी मानव ही है और उसकी कुछ त्रुटियों से क्षुब्ध होकर यदि पदच्युत किया जाता है तो प्रायश्चित के बाद उसको क्षमा भी किया जा सकता है। एक वीर राजा के बारे में जो अपेक्षायें की जाती हैं, वह इस मंत्र द्वारा प्रदर्शित की जा रही है— अ॒यं मे॑ व॒रणो म॒णिः सं॒पत्लुक्ष्य॑णो वृषा॑। तेना र॑भस्व॒ त्वं शत्रून् प्र मृ॑णीहि दुर॒स्यतः॥२ अर्थात् "हम सबमें मुख्य रूप से चयन करने योग्य श्रेष्ठतम व्यक्तियों, जो कि अपनी अपरिमित शक्ति द्वारा शत्रुओं का नाश करने में सक्षम हो, राजतिलक द्वारा अभिषेक करके प्रमुख नेता का चयन करते हैं। वह सब सुखों की वर्षा करने वाला, शकट का भार उठाने में समर्थ, बलवान् और शत्रुओं का नाशक है। हे राष्ट्रपते! ऐसे पुरुष के बल पर तू शत्रुओं का विनाश कर या पकड़ कर दुष्ट कामना करने वालों का दिनष्ट कर।" ऐसे राजा के नेतृत्व में चलने वाला शासन ही प्रजा को संतुष्ट करने में सक्षम होता है और राष्ट्रवासियों को अपनी सुरक्षा का विश्वास होता है। तब राष्ट्र स्वतः मजबूत होता है। इन्द्र॑श्च सोमं॑ पिबतं बृहस्पते॒ऽस्मिन् य॒ज्ञे म॑न्दसा॒ना वृ॑षण्वसू। आ वां॑ विश॒न्त्विन्द॑वः स्वा॒भुवो॒ऽस्मे र॒यिं सर्व॑वीरं॒ नि य॑च्छतम्॥३ अर्थात् "हे वेदवाणी के पालक एवं बृहत् राष्ट्र के पालक एवं विद्वान् राजन् ! हे इन्द्र! सेनापते! आप दोनों धनों, ऐश्वर्यों की वर्षा करने वाले हों। आप दोनों इस महान् यज्ञ, राष्ट्र की व्यवस्था के कार्य में अतिव्यग्र रहते हुए राज्यपद का उपभोग करें। १. अथर्ववेद ३/४/२ २. अथर्ववेद १०/३१ ३. अथर्ववेद २०/१३/१
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar