भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

पृष्ठ 304, कुल 353 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 304

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 276 वैदिक वाङ्ग्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता छान्दोग्य-उपनिषद् में बहुविध उपासना में विद्या, श्रद्धा और योग की आवश्यकता होती है। यदेव विद्यया करोति श्रद्धयोपनिषदा तदेव वीर्यवत्तरं भवतीति।¹ इसके साथ ही मनन-चिन्तन, विज्ञान और निष्ठा की अपरिहार्यता भी प्रदर्शित है। अभिमत-विशेष का प्रमाद रहित होकर ध्यान करना ही उपासना है- ध्यायात् न प्रमत्तः।² धर्म के बारे में बृहदारण्यकोपनिषद् में इस प्रकार वर्णित किया गया है-- अयं धर्मः सर्वेषां भूतानां मध्वस्य सर्वाणि भूतानि मधु यश्चायमस्मिन्धर्मे तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषो यश्चायमध्यात्मं धर्मस्तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषोऽयमेव स योऽयमात्मेदममृतमिदं ब्रह्मेदꣳ सर्वम्॥³ अर्थात् यह धर्म समस्त भूतों का मधु है तथा समस्त भूत इस धर्म के मधु है। इस धर्म में जो यह तेजोमय अमृतमय पुरुष है और जो यह अध्यात्म धर्मसम्बन्धी तेजोमय अमृतमय पुरुष है, यही वह है जो कि 'यह आत्मा है'। 'यह अमृत है', 'यह ब्रह्म है', 'यह सत्य है'। कठोपनिषद् में आत्मज्ञान के लिए तर्क, प्रवचन एवं बुद्धिजन्य उपायों को अपर्याप्त समझा गया है। इसके लिए अपने को सुपात्र बनाना पड़ता है। ताकि आत्मतत्त्व स्वयं वरण कर सकें। जो मनुष्य विज्ञान (विवेक) सारथि से सम्पन्न और मनरूप लगाम वाला है, वही परम पद प्राप्त करता है। कठोपनिषद् सावधान करता है कि हम अज्ञाननिद्रा से उठें, जागें और श्रेष्ठ पुरुषों के समीप जाकर ज्ञान प्राप्त करें। सम्पूर्ण ग्रन्थों में धर्माचरण का उपदेश दिया गया है। ईश्वर की प्राप्ति ही एक मात्र उद्देश्य मानकर मानव जीवन में सदैव सत्याचरण करके परम पद की प्राप्ति करें। ५. राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के परिप्रेक्ष्य में ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषदों के आचारदर्शन, शिक्षादर्शन तथा अर्थदर्शन का अनुशीलन : राष्ट्र का निर्माण मनुष्यों के द्वारा होता है और मनुष्यों के चारित्रिक बल, नैतिक मूल्य एवं आध्यात्मिक विचारधारा से ही राष्ट्र की दृढ़ता में शक्ति का समावेश होता है। हमारे धर्म ग्रन्थ, वैदिक वाङ्ग्मय ही हमें नैतिक मूल्यों, जीवन आदर्शों और आध्यात्मिक आधारों से अवगत कराते हैं। १. छान्दोग्योपनिषद् १/१/१० २. छान्दोग्योपनिषद् १/३/१२ ३. बृहदारण्यकोपनिषद् २/५/११ CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान) · पृष्ठ 304, कुल 353 में से · BharatKosha