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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 288 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता गृह्यसूत्रों और धर्मसूत्रों के अनुसार ही राजा राष्ट्र का प्रधान होने के नाते राष्ट्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध होता है। राजपुरोहित उसे नैतिकता से परिचित एवं निर्णय हेतु परामर्श प्रदान करता रहता है। राष्ट्र की शत्रुओं से रक्षा करना और प्रजा की भी रक्षा एवं भरण-पोषण का दायित्व राजा के प्रति होता है। जहाँ पर शत्रुरहित राष्ट्र हो, प्रजा खुशहाल रहती है। आपस में वैर और वैमनस्य का भाव न हो तो ऐसे राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता को कहीं से कोई खतरा नही होता है। हमारे धर्मसूत्र ही हमें धार्मिक व नैतिकतापूर्ण राष्ट्र के बारे में अवगत कराते हैं। ४. राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के परिप्रेक्ष्य में गृह्यसूत्र एवम् धर्मसूत्र के धर्मदर्शन का अनुशीलन- धर्म ही से सम्बद्ध सारे नियम, सिद्धान्त और व्यवस्थाओं को ही मानव जीवन को संचालित करने के लिए निश्चित किया गया है। धर्म की धुरी पर परिक्रमा करता हुआ मानव जीवन उससे अलग होकर कुछ धर्म विरुद्ध कर ही नहीं सकता है। तन्त्रवार्तिककार भट्ट कुमारिल का कथन है कि सभी धर्मसूत्र वर्णों और आश्रमों के कर्तव्यों का उपदेश देते हैं। व्यवहारधर्म तथा राजधर्म भी इसमें सम्मिलित है। इसमें 'सामयाचारिक धर्म' (समय अथवा परम्परा पर आधृत धर्म) की विशेष व्याख्या की गई है। 'स्मृति' में इसी का नामान्तर है। अतएव स्मार्त धर्म भी इसे कहा जा सकता है। गौतम धर्मसूत्र के मतानुसार वेद, वेदज्ञों के आचरण तथा उनकी धर्मपरम्परा के मूल हैं- वेदो धर्ममूलम्। तद्विदाञ्च स्मृतिशीले।१ इसी की पुष्टि आपस्तम्ब तथा अन्य धर्मसूत्रों ने भी की है- धर्मज्ञसमयः प्रमाणं वेदाश्च२ एवम् श्रुति स्मृति विहितो धर्मः। तदलाभे शिष्टाचारः प्रमाणम्।३ मनुप्रभृति धर्मशास्त्रियों ने वेद वेदज्ञों के साथ ही शिष्ट तथा साधु पुरुषों के आचरण को भी धर्म कोटि में सम्मिलित कर दिया है। शिष्ट श्रेणी में स्वार्थहीन और निःस्पृह व्यक्तियों को ही रखा गया है। १. गौतम धर्मसूत्र १/१-२ २. आपस्तम्ब धर्मसूत्र १/१/२ ३. आपस्तम्ब धर्मसूत्र १/१/३ CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar