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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 325

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri नवम अध्याय 297 अर्थात् इसमें राष्ट्र की प्रगति का मूलमंत्र बताते हुए कहा गया है कि सामूहिक प्रगति उस दिशा में ही संभव है जबकि नाना प्रकार के धर्मों को मानने वाले एवं भिन्न-भिन्न प्रकार के भाषाभाषी जन उसी प्रकार संगठित होकर रहते हैं जैसे कि एक परिवार में अत्यधिक विषमता रहने पर भी परिवार के सभी सदस्य परस्पर सद्भावना और सहानुभूतिपूर्वक रहते हैं। प्रत्येक परिवार में बाल, वृद्ध, युवा, महिलाएँ और पुरुष रहते हैं लेकिन एक छत के नीचे कोई भेदभाव नहीं होता। सभी आपस में समस्त भेदभावों से दूर होकर संगठित रूप से रहते हैं। आज के वर्तमानभारत में उस काल में वर्णित सभी दशाएँ विद्यमान हैं। इस विशाल राष्ट्र में नाना धर्म के लोग निवास करते हैं लेकिन मानव धर्म की परिभाषा सभी धर्मों में एक ही है। छोटी-छोटी बातों को देखा जायें तो जो बात एक धर्म में मान्य है वही दूसरे धर्म में अमान्य हो सकती है। अनेक भाषाभाषी लोग यहाँ पर रहते हैं। जब मिलते हैं तो भाषा न जानने पर भी टूटी-फूटी राष्ट्रभाषा का सहारा लेकर आपस में बात समझ ही लेते हैं। आज राष्ट्र की संघ-व्यवस्था का स्वरूप सम्पूर्ण राज्यों को एक संविधान के अन्तर्गत बाँध कर रखे है तथा हमारे राष्ट्र की शासन प्रणाली का लोकतांत्रिक स्वरूप आज की देन नहीं है अपितु यह वैदिक वाङ्मय में ही निश्चित कर दी गई थी। यह भी राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता की दिशा में अमूल्य योगदान है। २. राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के सम्बन्ध में आधुनिक विचारधारा : राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता का जो स्वरूप भारत में प्राप्त होता है अन्यत्र कहीं प्राप्त नहीं होता है। राष्ट्रीयएकता मानव हृदयों में व्याप्त वह भावना है जो यदि राष्ट्रवासियों के मनमानस में एक बार निर्मित हो जाती है तो फिर कभी खण्डित नहीं होती है। यह भावना आज ही जागृत हुई हो ऐसा नहीं है, अपितु ऐतिहासिक क्रम में इसका पृथक् अस्तित्व उस चेतना का प्रतीक है जो सामान्य प्रवृत्तियों, परम्परागत रीति-रिवाजों, स्मृतियों, आकांक्षाओं, अवर्णनीय सांस्कृतिक धरोहरों एवं हितों पर आधारित होती है। राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के बारे में विभिन्न विद्वानों के विभिन्न विचार हैं। इस भावना पर प्रश्न चिह्न भी लगाये जाते हैं। कुछ लोगों का मत है कि भारत में अनेक भाषाएँ, अनेक धर्म, अनेक प्रकार के रीति-रिवाज पाये जाते हैं। भौगोलिक एकता भी नहीं है। एक ओर थार का मरुस्थल है तो दूसरी ओर कश्मीर की घाटी है। जातीय- एकता का भी कहीं नामोनिशान नहीं है। विभिन्न जातियाँ यहाँ पर रहती हैं। कतिपय CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar