वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 326, कुल 353 में से
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298 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता विद्वानों का, इन्हीं कारणों से दृष्टिपात करते हुए अभिमत है कि भारत एक राष्ट्र है। भारत के समस्त निवासी सदा से इस देश के प्रति एक आन्तरिक प्रेम और प्रगाढ़ एकता का अनुभव करते रहे हैं। यह भावना चिर स्थायी है। इस का प्रतीक है हमारी तीनों सेनाएँ, जिनमें राष्ट्र के सभी प्रदेशों, सभी जातियों के लोग देश की सुरक्षा के लिए दिन-रात सीमाओं पर चौकन्ने रहते हैं। वे सिर्फ अपने राष्ट्र के लिए चौकन्ने रहते हैं, देश के सजग प्रहरी होते हैं और उनमें सिर्फ भारतीय होने की भावना ही समाहित होती है। जन सामान्य में भी यह भावना राष्ट्र के ऊपर संकट के समय देखी जा सकती है। सामान्य दिनों में राष्ट्रीयएकता और अखण्डता का प्रमाण देने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। यह भावना तभी प्रदर्शित करने की आवश्यकता पड़ती है जबकि राष्ट्र संकट की घड़ी से गुजर रहा हो। इसके ज्वलंत उदाहरण है १९६२ में हुई भारत और चीन की लड़ाई, जहाँ भारतीय जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाई, वहीं साधारण लोगों ने अपने जेवर, कपड़े, धन, जिसके पास जो था जवानों के लिए, देश की रक्षा के लिए राष्ट्रीय रक्षाकोष में दान कर दिया। १९६५ की भारत- पाक लड़ाई भी ऐसी ही सिद्ध हुई। १९७१ में बांग्लादेश के सहायतार्थ लड़ी गई लड़ाई भी हमारे परीक्षा के क्षणों में से एक थी। वह राष्ट्रीयएकता और अखण्डता का प्रमाण था कि हम हमेशा विजयी होते रहे हैं। दुश्मन को हमारी पवित्र भावनाओं ने तोड़ कर रख दिया। राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के बारे में हमारे स्व० डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने भावों को इस तरह व्यक्त किया है— 'राष्ट्रीयएकता' विविधताओं के बीच ऐसी स्थिति का नाम है जिसमें व्यक्ति अपने सभी देशवासियों के साथ एकजुटता का भाव अपनाते हुए राष्ट्र की रक्षा और विकास हेतु राष्ट्र के प्रति अपना सब कुछ बलिदान करने के लिए तत्पर हो जाता है। हमारी राष्ट्रीयएकता और अखण्डता की नींव खोखली नहीं है बल्कि वट वृक्ष की तरह अन्दर मीलों गहराई में फैली हुई है, जिन्हें सेंध लगाकर काटा नहीं जा सकता है। वह वैदिककाल से इस जमीन की तह में समाई हुई है। इस बारे में डॉ० वासुदेव शरण अग्रवाल ने कहा है— 'अंग्रेजी शासन काल में हमारी राष्ट्रीयएकता को गहरा आघात पहुँचा। 'फूट डालो और राज करो' की नीति के कारण हमारी एकता भंग हुई। अंग्रेज अधिकारियों के प्रयास और प्रोत्साहन से देश का विभाजन हुआ, भारत का अंग विच्छेदन करके एक पृथक् और स्वतंत्र राष्ट्र पाकिस्तान की स्थापना हुई। विभाजन के बाद भी भारत
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar