वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri नवम अध्याय 299 एक विशाल देश है। यहाँ अब भी लोग विभिन्न भाषाएँ बोलते हैं। भिन्न-भिन्न धर्मों को मानते हैं और उनके रीति-रिवाज भी अलग-अलग हैं। ऐसी विभिन्नता वाले देश को एकता के सूत्र में मजबूती से बाँधना एक महत्त्वपूर्ण समस्या है। जहाँ विभिन्नता पाई जाती है वहाँ पर मत-वैभिन्न की सम्भावना हमेशा बनी रहती है। यथार्थ स्थिति से अवगत व्यक्ति इसको सूक्ष्म दृष्टि से देखने के बाद ही विवेचन करता है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ० राजेन्द्र प्रसाद का मत इस प्रकार है— "सांस्कृतिक अथवा सामूहिक चेतना ही हमारे देश का प्राण है। इसी नैतिक चेतना के सूत्र में हमारे नगर और ग्राम, हमारे प्रदेश और सम्प्रदाय, हमारे विभिन्न वर्ग और जातियाँ आपस में बँधी हुई हैं। जहाँ उनमें और सब तरह की विभिन्नतायें हैं, वहीं उन सबमें एक एकता भी विद्यमान है।" यह एकता एक स्थायी भावना है जो कि इस पावन भूमि पर जन्म लेते ही मानव के मन में समाहित हो जाती है। बचपन से माँ की गोद में बैठकर सुनी गई भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद की बलिदान-गाथाओं से बच्चों के मन-मानस को एक नया स्वरूप देश के प्रति मिलता है, जो अमिट होता है। यही चिर स्थायी रूप उनके लिए आदर्श बन जाता है। इस बारे में प्रसिद्ध राजनीतिशास्त्रज्ञ रजनी कोठारी का मत इस प्रकार है— "भारत जैसे विशाल देश में जहाँ इतने विविध प्रकार के लोग रहते हैं, एकता की स्थापना इसी से हो सकती है कि सब तत्त्वों को राजनीतिक सत्ता व अधिकार में बाँट दिया जाये और सबको साथ लेकर चला जाये। इसके लिए आवश्यक है कि समाज के सब वर्गों का राजनीतिक व्यवस्था में प्रवेश हो। राजनीति की इस रचनात्मक भूमिका से ही एकीकरण की प्रवृत्तियों को बल मिलता है।"¹ यदि वैदिक काल में राष्ट्र और राष्ट्रीयता की भावना प्रबल थी, जिससे विविधताओं के होते हुए भी प्राचीन भारतीय संस्कृति ने भौगोलिक एकीकरण और समुच्चय की भावना को बचाये रखा। इसी बात को डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल ने निम्न शब्दों में व्यक्त किया है— "यहाँ की कोटि-कोटि जनता के मन में भारत की भौगोलिक एकता का गहरा संस्कार था। हमारी संस्कृति विविधताओं को स्वीकार करती है, किन्तु एकत्व की प्राप्ति उसकी निजी विशेषता है।" १. कोठारी- भारत में राजनीति, पृ० ३४७ CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar