भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 328

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300 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता आज विश्व के पटल पर जो भारत का नाम उभरता ही जा रहा है, उसके पीछे कोई राजनीतिक उपलब्धियों का इतिहास नहीं है बल्कि वह राष्ट्रवासियों में रहने वाला राष्ट्र के प्रति प्रेम है जो उन्हें हर क्षेत्र में, चाहे वह विज्ञान हो, प्रौद्योगिकी, कला या शिक्षा कोई भी क्षेत्र क्यों न हो, सभी अपने देश के नाम को उसमें ऊँचा देखने की इच्छा रखते हैं। इसके लिए सतत् प्रयत्नशील रहेंगे कि देश का नाम ऊँचाइयों तक पहुँचे। यही राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता का एक नया स्वरूप है। देश की राष्ट्रीयएकता को हम अपने देश के सन्दर्भ में इन शब्दों में भी व्यक्त कर सकते हैं- " राष्ट्रीय एकता का अर्थ है भारत के विभिन्न प्रदेशों, जातियों, वर्गों, भाषाओं, धर्मों आदि की बहुरंगी विविधता के बीच एकता की व्यापक धारणा, जो क्षुद्र सीमित स्वार्थों की उपेक्षा कर देश के विभिन्न प्रदेशों पर अखिल राष्ट्रीय दृष्टिकोण से विचार और व्यवहार की प्रेरणा दे।" इसी राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता पर सम्पूर्ण राष्ट्र को गर्व है कि हमारा एक संविधान, एक राष्ट्रीय ध्वज और एक ही राष्ट्रीय सम्मान सदैव अक्षुण्ण रहेंगे। ३. राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के सम्बन्ध में प्राचीन एवम् आधुनिक विचारधारा की तुलना- राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता का हर युग में उतना ही महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है जितना कि यह आज है। एकता से तात्पर्य वैचारिक एकता, मतैक्यता और उनके कार्यों में भी एकता का पाया जाना, माना जा सकता है। इस बारे में ऋग्वेद में वर्णित है- सं ग॑च्छध्वं॒ सं व॑दध्वं॒ सं वो॒ मना॑ंसि जानताम्। दे॒वा भा॒गं यथा॒ पूर्वे॑ सञ्जाना॒ना उ॒पास॑ते॥१ अर्थात् सभी लोग साथ-साथ चलें, साथ बोलें, तुम सभी का मन ऐकमत्ययुक्त हो जाय, जिस प्रकार पुरातन देवता ऐकमत्य के साथ अपना भाग लेने के लिए बैठते हैं। स॒मा॒नी व॒ आकू॑तिः समा॒ना हृदया॑नि वः। स॒मा॒नम॑स्तु वो॒ मनो॒ यथा॑ वः॒ सुस॒हास॑ति॥२ १. ऋग्वेद १०/१९१/२ २. अथर्ववेद ६/६४/४

CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar