भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri नवम अध्याय 303 ४. राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के साधक एवं बाधक तत्त्व : किसी भी राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता उसके दृढ़ अस्तित्व के लिए आवश्यक तत्त्व हैं। राष्ट्रीय एकता, एक राष्ट्र में निवास कर रहे लोगों के हृदय की वह एकता है जो एक बार बनने के बाद कभी खण्डित नहीं होती। यह भावना ऐतिहासिक क्रम में पृथक् अस्तित्व की उस चेतना का प्रतीक है जो सामान्य आदतों, परम्परागत रीति- रिवाजों, स्मृतियों, आकांक्षाओं, अवर्णनीय सांस्कृतिक समस्याओं तथा हितों पर आधारित है। भारत एक राष्ट्र है जबकि उसमें अनेक भाषाएँ, अनेक धर्म, अनेक प्रकार के रीति-रिवाज पाये जाते हैं और उसमें भौगोलिक एकता भी नहीं है। एक ओर थार का मरुस्थल है तो दूसरी ओर कश्मीर की घाटी है। जातीय विभिन्नता भी यहाँ विद्यमान है। इन्हीं कारणों से कतिपय विद्वानों का मत है कि भारत एक राष्ट्र है ही नहीं, यह तो अनेक राज्यों का एक संघ है। भारत की इस विभिन्नता में भी एकता पाई जाती है। हम सांस्कृतिक दृष्टि से एक हैं, धार्मिक सहिष्णुता ही हमारी एकता और अखण्डता का आधार है। समस्त निवासी सदा से उस देश के प्रति ऐसी अनन्य भक्ति, विशेष प्रकार के प्रेम और परस्पर विशिष्ट प्रकार की प्रगाढ़ एकता का अनुभव करते रहे हैं और यही अनुभव सम्पूर्ण विश्व के समक्ष राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस राष्ट्रीयएकता और अखण्डता को स्थायी बनाये रखने में कुछ घटक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं- १. संस्कृति :- भारतीय संस्कृति में ऐसा गुण है कि उसने मानव में सदैव मानवता का गुण समाहित किया है। हमारे वैदिक साहित्य, काव्य, रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता, सभी ने भारतीयों के मन-मस्तिष्क में नैतिक, आध्यात्मिक और सदाचार का ऐसा समावेश किया है कि उसको वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा सदैव साकार होती दृष्टिगोचर होती है। सम्पूर्ण भारत में हम कहीं भी रहें- वेद, पुराण, उपनिषद्, रामायण और गीता, सभी भाषाओं में उपलब्ध हैं। उनके आदर्शों के अनुयायी देश भर में निवास करते हैं। यह संस्कृति हमें एकता के सूत्र में बाँधे रखती है। २. संविधान में निष्ठा :- स्वतंत्रता के बाद हमारे संविधान का निर्माण किया गया जिसमें भारत के सभी वर्गों के लोगों का प्रतिनिधित्व था। देश ने सभी लोगों को आत्मसात कर लिया था। जो अल्पसंख्यक थे, शरणार्थी थे या विदेशी थे, उनके वर्ग के अनुसार ही उन्हें प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया। सबको धर्म की स्वतंत्रता CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar