वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 304 वैदिक वाङ्गमय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता प्रदान की गई। अपने लिए व्यवसाय के चुनाव की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई। सभी धर्मों को सम्मान की दृष्टि से देखा गया। राष्ट्र में कहीं भी निवास करने की एवं सम्पत्ति अर्जित करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई। ऐसे संविधान की छाया में जीवन व्यतीत करने वालों में वैमनस्यता जैसी भावना आने का प्रश्न ही कहाँ उठता है? ३. धर्मनिरपेक्षता :- हमारा राष्ट्र एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है और ऐसे राष्ट्र में धर्म के आधार पर कोई भी भेदभाव नहीं किया जा सकता। हम जब सभी धर्म वालों को सम्मान की दृष्टि से देखेंगे तो आपस में प्रेम और सद्भाव में वृद्धि अवश्य ही होगी। सभी धर्मों के लोग अपने पूजा स्थलों के निर्माण, पूजा पद्धति अपनाने और अपने धार्मिक उत्सवों को पूर्ण करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। एक हिन्दू मुसलमान को ईद पर बधाई देता है तो मुसलमान दीपावली और होली पर प्रेम से सम्मिलित होते हैं। जहाँ इतने विशाल हृदय के लोग हों, वहाँ एकता पर प्रश्नचिह्न कहाँ लगाया जाये? ४. लोकतांत्रिक व्यवस्था :- स्वतंत्रता के बाद देश में संघात्मक लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया गया। इसमें देश में व्याप्त विविधता का पूर्ण रूप से सम्मान किया गया है। सभी वर्गों को अपनी सरकार चयन का अधिकार प्रदान किया गया। शासन में उनकी अपनी भागीदारी से उनमें देश के प्रति निष्ठा में वृद्धि होती है। अपनी बात कहने का अधिकार उन्हें संविधान से प्राप्त है। सभी राज्य अपने-अपने कार्यों के लिए स्वतंत्र है। इससे देशवासियों का अपने राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता के प्रति विश्वास और निष्ठा में वृद्धि ही होती है। ५. अनेकता में एकता :- भारत एक विशाल देश है, उसमें अनेकता होना स्वाभाविक है। इसके बाद भी समग्र रूप से दृष्टिपात किया जाय तो इस अनेकता में ही एकता का सूत्र बँधा हुआ है। सदियों से यहाँ विभिन्न धर्म हैं लेकिन सबमें एक दूसरे के प्रति सम्मान है। सामाजिक व्यवस्थाओं में खान-पान में प्रादेशिक रूप में विभिन्नता है लेकिन दक्षिणवर्ती भारतीय व्यवस्थाएँ उत्तर भारत में लोकप्रिय हैं। सम्पूर्ण राष्ट्र की भौगोलिक स्थितियाँ भिन्न-भिन्न हैं, फिर भी प्राचीन काल से ही यह राष्ट्र एकता के सूत्र में बँधा हुआ है। उन एकता और अखण्डता की गहरी जड़ों को खोदने का प्रयास व्यर्थ ही कहा जायेगा। ६. स्वतंत्रता संग्राम :- भारत की आजादी के लिए जो महासंग्राम लड़ा गया, तब इस पर शहीद होने वाले वीर हिन्दू, मुस्लिम, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध सभी लोग थे। उस महायज्ञ में सबने अपने-अपने प्राणों की आहुति दी थी। अब स्वतंत्र भारत की खुली हवा में हमने सांस ली हैं। कोई नहीं भूलता हैं उन बलिदानों CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar