भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 306 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता पर राजनीति करने वालों ने धर्म के नाम पर दीवार खड़ी की है और ये दीवारें देश की एकता में बाधक बन सकती हैं। ३. भाषावाद - भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है, यहाँ अनेक भाषायें, विभाषायें और बोलियाँ प्रचलित हैं। यद्यपि स्वतंत्र भारत में हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गया है लेकिन भाषायी संकीर्णता भी अपना सिर उठाने लगी है। भाषा के आधार पर राज्यों की माँग सिर उठाने लगी है। हिन्दी के विरोध में उर्दू और अन्य प्रादेशिक भाषाएँ भी विवाद का कारण बनकर मानव-मानव के मध्य भेद पैदा कर रही हैं और यह विभेद राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के लिए बाधक साबित हो रहे हैं। ४. प्रान्तीयता - एक संघराष्ट्र के लिए उसके प्रान्त एक अभिन्न अंग होते हैं। संघ में सभी प्रान्तों को बराबर अधिकार प्रदान किये गये हैं। अंग्रेजों ने हमें सिर्फ धर्म के आधार पर ही नहीं बाँटा अपितु प्रान्तीय आधार पर भी बाँट दिया है। कभी क्षेत्र को लेकर, कभी भाषा को लेकर, प्रान्तीयता की बात होने लगती है और यह प्रान्त स्वराज्य की माँग भी करते हैं जो संघ के शासन में रहने से इन्कार करते हैं। इन माँगों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। खालिस्तान की माँग वर्षों से आतंकवादी गतिविधियों का सहारा लेकर अशान्ति फैला रही है लेकिन अनुचित को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी इस तरह की भावना की उपस्थिति राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता के मार्ग में रोड़ा अवश्य ही बन जाती है। ५. अल्पसंख्यकों का प्रश्न - आज देश में अल्पसंख्यकों की समस्या महत्त्वपूर्ण है। विभिन्न राज्यों में भाषागत अल्पसंख्यक सम्प्रदायों से अल्पसंख्यकों का निवास है। मुम्बई, कोलकत्ता, चेन्नई, दिल्ली आदि महानगरों में तो उद्योग तथा व्यापार की दृष्टि से बाहरी राज्यों के हजारों लोग निवास करते हैं। कई राज्यों में बाहरी लोगों के प्रति असन्तोष पैदा हुआ है। महाराष्ट्र में गुजरातियों, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उड़ीसा में मारवाड़ियों का विरोध किया गया। महाराष्ट्र में शिवसेना और असम में लांछ्छित सेना जैसे उग्र संगठनों का निर्माण कर बाहरी लोगों के प्रति हिंसात्मक कार्यवाही की गई जो कि एक राष्ट्र की मर्यादा के विरुद्ध है और राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता के लिए बाधक है। ६. राजनैतिक अवसरवादिता - राजनैतिक अवसरवादिता राष्ट्र के लिए सर्वाधिक घातक है। देश में राजनैतिक दल जाति, धर्म, भाषा, प्रान्त आदि के बल पर चुनाव लड़ने और जीतने का कोई भी अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहते हैं। राजनैतिक दल ही युवा वर्ग को हिंसात्मक कार्यों के लिए भड़काते हैं और इस तरह की घटनाओं से अपने राजनैतिक स्वार्थ को सिद्ध करना चाहते हैं। देश में होने वाले CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar