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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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नवम अध्याय 307 साम्प्रदायिक दंगों और पृथकतावादी आन्दोलनों के पीछे राजनीतिज्ञों का हाथ सदैव रहता है और यह सारी विचारधारा देश हित में सहायक नहीं कही जा सकती है। ७. आर्थिक विषमता - देश में व्याप्त आर्थिक विषमता भी राष्ट्रीयएकता और अखण्डता के मार्ग में बाधक बन जाती है। जो लोग अत्यधिक निर्धन हैं या अभावग्रस्त हैं, जिन्हें दिनभर कड़ी मेहनत के बाद भी पेट भर भोजन नहीं मिलता, वे अपने मालिकों या बड़े-बड़े बंगलों में सुख-सुविधाओं से युक्त जीवन जीने वालों के प्रति ईर्ष्या का भाव रखें तो अस्वाभाविक नहीं कहा जा सकता है। आर्थिक विषमता ने वर्गसंघर्ष के सिद्धान्त को जन्म लिया है, जो समाज में अशान्ति और संघर्ष का सृजन करता है। यह आर्थिक विषमता सदैव ही राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के लिए घातक तत्त्वों का निर्माण करती है। ८. आतंकवादी गतिविधियाँ - देश में आतंकवादी गतिविधियों ने सम्पूर्ण राष्ट्र की जड़ों को हिला दिया है। कभी कश्मीर में सामूहिक हत्याओं का तांडव होता है, कभी बिहार में गाँव उजाड़ दिया जाता है। इन सब का अर्थ क्या समझा जा सकता है? हम अखण्ड राष्ट्र में निर्भीक जीवन व्यतीत कर रहे हैं? हम अपने ही देश में डर डर कर जी रहे हैं। सुरक्षित ठिकानों के लिए यह सब देश की राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता के लिए अभिशाप है। आज उत्तरी पूर्वी भारत के कुछ राज्यों में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता के लिए समस्याएँ चुनौती बनकर खड़ी हैं। भ्रष्टाचार, अशिक्षा, शोषण, बेरोजगारी- ऐसी समस्यायें हैं जो कि जन सामान्य को दिशा भ्रमित होने के लिए पर्याप्त हैं और जहाँ देश का जनसामान्य इन समस्याओं से जूझ रहा हो वहाँ राष्ट्र का निर्माण और विघटन की चिन्ता किसे होती है ? ५. वैदिकवाङ्मय में निरूपित राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता का वर्तमान राष्ट्रीयएकता एवं अखण्डता के लिए योगदान- भारतीय जनजीवन में वेदों का अतिशय महत्त्व है। वैदिकवाङ्मय को परमेश्वर का निःश्वास कहा गया है।१ वेद सत्य है। वेद सत्य ज्ञान की अप्रतिम निधि, सत्य विधाओं का अनन्य एवं अपूर्व संग्रह तथा समस्त सिद्धान्तों का पोषक अद्वितीय ग्रंथ है। इन ग्रन्थों में मात्र धार्मिक कर्मकाण्डों का ही वर्णन नहीं है, अपितु आज के सन्दर्भ में देखा जाय तो आज की समस्याओं को अनुभव करके उनका समाधान भी इनमें १. बृहदारण्यकोपनिषद् २/४/१०

CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar