वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 340, कुल 353 में से
संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri
312 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता बम विस्फोट, सामूहिक हत्याएँ, रासायनिक हथियारों का प्रयोग अधिक तेज होगा। श्रीलंका में तमिलों, जापान में रेड आर्मी, भारत में सिख होमलैण्ड चाहने वालों आदि के हिंसात्मक संघर्ष आतंकवाद की श्रेणी में आते हैं। भारत में आतंकवाद :- स्वाधीनता के पश्चात् भारत के विभिन्न भागों में अनेक आतंकवादी संगठनों द्वारा आतंकवादी उग्र हिंसा फैलाई गई। उन्होंने बड़े-बड़े सरकारी अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया और इतना आतंक फैलाया कि जनसामान्य ने पलायन करना आरम्भ कर दिया। सर्वप्रथम स्वतंत्रता के बाद तेलंगाना के साम्यवादियों ने हिंसक विद्रोह किया, उसकी असफलता के बाद भारत के उत्तरी पूर्वी क्षेत्र में आतंकवाद उभरने लगा। संगठित रूप से आतंकवाद नागालैण्ड में सामने आया जब फिजी में नागा राष्ट्रीय परिषद का गठन किया गया और अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रशिक्षित गुरिल्ला दस्तों का गठन हुआ। इसके बाद मिजोरम में लाल डेंगा ने 'मिजोरम-नेशनल फ्रंट' और मणिपुर में विश्वेश्वर सिंह ने 'पीपुल्स लिबरेशन आर्मी' के रूप में आतंकवादी संगठनों की स्थापना की। भारत में आतंकवाद का सबसे भयावह रूप पंजाब में खालिस्तान के समर्थकों ने प्रस्तुत किया। इस आतंकवाद का जन्मदाता जरनैल सिंह भिंडरवाले को दिया जा सकता है। इसी के अन्तर्गत अमृतसर के पवित्र स्वर्ण मन्दिर को आतंकवादी गतिविधियों का गढ़ बना दिया गया। वहाँ से हिंसात्मक गतिविधियों का संचालन होने लगा। जून १९८४ में भारत सरकार को बाध्य होकर सेना का उपयोग करना पड़ा और आपरेशन ब्लू स्टार नामक कार्यवाही ने उग्रवादियों की संगठन शक्ति को समाप्त कर दिया। इसके प्रतिक्रिया स्वरूप ही ३१ अक्टूबर १९८४ को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी की हत्या की गई। इसके बाद हुए दंगों से हिन्दू और सिखों के मध्य विद्वेष की भावना परिलक्षित हो गई। इस आतंकवादी संगठन को लगातार विदेशी सहायता प्राप्त होती रही। इसके बाद आतंक फैलाने की दृष्टि से जगह-जगह 'ट्रांजिस्टर बम विस्फोट' किये गये जिससे कि सैकड़ों लोगों की जानें चली गयीं। भारतीय लोकतंत्र और स्वयं भारत राष्ट्र के लिए 'आतंकवाद' एक गम्भीरतम चुनौती बना हुआ है। देश की राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के लिए एक बारुद का गोला बना हुआ है। कश्मीर प्रदेश तो सिर्फ पाकिस्तान की अनाधिकार चेष्टा के कारण ही इसका शिकार बना हुआ है। आतंकवाद सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक— विविध आयामों वाली एक समस्या है। अतः इसके निवारण हेतु सभी स्तर पर प्रयास करना आवश्यक है। उसके लिए सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर कठोर प्रयास होना अत्यन्त आवश्यक है।
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar