वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 341, कुल 353 में से
संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri
दशम अध्याय 313 आतंकवाद के नियंत्रण हेतु सुझाव :- समस्या कितनी भी जटिल क्यों न हो, यदि उसको जड़मूल से समास नहीं किया जा सकता है, फिर भी उसे नियंत्रित तो अवश्य ही किया जा सकता है। इसके लिए सभी स्तरों पर प्रयास आवश्यक है— (क) राष्ट्रीय समस्याओं पर आम सहमति :- आतंकवाद केवल कानून और प्रशासनिक व्यवस्था का प्रश्न नहीं है वरन् इसका एक राजनैतिक पक्ष भी है। इसके लिए आवश्यकता इस बात की है कि चाहे 'पंजाब समस्या', 'जम्मू-कश्मीर समस्या' या 'असम समस्या' हों, उनके समाधान के लिए 'राजनैतिक स्वार्थों' को त्याग कर कठोर प्रयास करने चाहियें। वे राजनैतिक दल जो सत्ता में नहीं हैं, सत्ता पक्ष पर प्रहार करने के लिए उनको एक विषय बना लेते हैं और मात्र 'विरोध के लिए विरोध' की ही दृष्टि से सरकार के क्रियमाण प्रयासों का विरोध ही करते रहते हैं। वस्तुतः राष्ट्रीय समस्याओं पर आम सहमति कायम करके दलीय राजनीति से ऊपर उठकर विचार किया जाना चाहिये और इनका समाधान खोजना चाहिये। (ख) विधि एवं न्याय व्यवस्था में सुधार :- अपनी विधि एवं न्याय व्यवस्था में १०० वर्ष पूर्व ब्रिटेन को आदर्श मानकर अपनाई गई विधि प्रक्रिया और न्याय व्यवस्था इतनी जटिल एवं दीर्घकालीन और व्ययी है कि साधन सम्पन्न अपराधी के लिए विधि और न्याय का पालन कोई आवश्यक नहीं है। वे मुक्त और जनसामान्य को आतंकित करते हुये घूमते रहते हैं। आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए 'अपराधी के लिए लगभग तत्काल दण्ड की व्यवस्था' को अपनाते हुए साधारण जनता के मन मस्तिष्क में विधि और न्याय के प्रति विश्वास और अपराधी तत्त्वों में आवश्यक रूप से भय उत्पन्न करना होगा। (ग) पुलिस और सुरक्षाबलों का आधुनिकीकरण :- पुलिस और सुरक्षा बलों का आधुनिकीकरण किया जाना अत्यन्त आवश्यक है। आज की स्थिति यह है कि 'केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल' के जवान जिन सुरक्षा साधनों से युक्त होते हैं— वहीं आतंकवाली उनसे अधिक अति आधुनिक साधनों से सम्पन्न होते हैं। एक दूसरे का सामना करने में भारतीय जवान अपने को कहीं भी सक्षम नहीं पाते। इनकी पुलिस एवं सुरक्षा बल की सेवा-शर्तों में भी सुधार अपेक्षित है क्योंकि अपनी जान की बाजी लगाने वाले इन सुरक्षा प्रहरियों को अपने परिवार की सुरक्षा का भय भी बना रहता हैं। उनकी निष्ठाथें कहाँ तक समर्पित हो सकती हैं? अपने प्रशासनिक पद्धति में सुधार करना होगा तभी निपटा जा सकेगा आतंकवाद से। (घ) आतंकवाद के विरुद्ध शासन और जनता के बीच सहयोग :- राष्ट्र की समस्याओं का समाधान सिर्फ शासन नहीं खोज सकता है, हर चरण पर उन्हें जन
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar