वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 314 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता सामान्य के सहयोग की आवश्यकता होती है। आतंकवाद से भी निपटने के लिए जन सहयोग बहुत सहयोगी प्रयास सिद्ध होगा। इसके लिए जन जागृति पैदा करनी होगी, उन्हें आतंकवादी घटनाओं के प्रति सिर्फ सहानुभूति प्रकट करना ही नहीं अपितु उनसे निपटने के लिए संघर्षशक्ति एवं इच्छा प्रकट करनी होगी। इसके लिए 'अखिल भारतीय शान्ति सेना' के गठन का सुझाव दिया जा रहा है, इस पर सही तरीके से ध्यान देने की आवश्यकता है। (ङ) सामाजिक स्तर पर कार्य :- इस प्रसंग में महत्त्वपूर्ण सुझाव यह हो सकता है कि आतंकवाद का जवाब आतंकवाद से देने पर इसका हल नहीं हो सकता है, अपितु इसमें कई गुना वृद्धि हो सकती है। 'आतंकवाद' समाज और देश की ही सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों से उत्पन्न 'मानसिक रोग' के रूप में होता है। केवल बल के प्रयोग के आधार पर इसको सुलझाया नहीं जा सकता है। इनके मूल कारणों को समझने के लिए सामाजिक संस्थाओं को अध्ययन करना होगा। विभिन्न समुदायों के बीच के भेदभाव को मिटाने के लिए प्रयत्न करना होगा। उनके अन्दर कमजोर पड़ गई भाई-चारे की भावना को पुनः जगाकर इसे मिटाने का प्रयास करना होगा। (च) संवैधानिक प्रावधानों के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक :- पंजाब और जम्मू कश्मीर राज्य में जो स्थिति है उसका सबसे बड़ा कारण है कि कुछ परिस्थितियों में स्वयं केन्द्रीय सरकार ने संवैधानिक प्रावधानों, विशेषतया राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की व्यवस्था का दलगत हितों की दृष्टि से प्रयोग किया। 'सरकारिया आयोग' ने अपनी रिपोर्ट (नवम्बर १९३७) में अनुच्छेद ३५६ के आधार पर राष्ट्रपति शासन लागू करने की व्यवस्था का दुरुपयोग रोकने की आवश्यकता पर बल दिया है और इस सम्बन्ध में कुछ सुझाव दिये हैं; प्रथम राज्य में राष्ट्रपति शासन अन्तिम विकल्प के रूप में ही लागू होना चाहिए, जबकि राज्य का कामकाज संविधान में दी गई व्यवस्था के अनुसार चलना असम्भव हो जाये। राष्ट्रपति शासन लागू करने से पहले केन्द्र सरकार द्वारा सम्बन्धित राज्य को इस बारे में चेतावनी देकर स्पष्टीकरण माँगा जाना चाहिए और निर्णय लेते समय इस स्पष्टीकरण पर विचार करना चाहिए। द्वितीय, राष्ट्रपति शासन लागू करने के पीछे जो कारण हैं उन्हें स्पष्ट रूप से बतलाया जाना चाहिए। तथ्य यह है कि यदि अनुच्छेद ३५६ के दुरुपयोग को रोकने की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो आतंकवादी-तत्त्वों को शक्तिशाली होने के अवसर प्राप्त होते रहेंगे। (छ) आर्थिक-सामाजिक न्याय की प्राप्ति :- हमारे देश में अन्य देशों की भाँति बेरोजगारी और विशेषतया शिक्षित वर्ग में बेरोजगारी का व्याप्त होना ही आतंकवादी CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar