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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 43

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri प्रथम अध्याय 15 सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि। ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः॥१ अद्वैत वेदान्त में समस्त प्राणियों में एक ही ईश्वर की सत्ता स्वीकार की गयी है। यहाँ अपने और पराये के लिए कोई स्थान ही नहीं है। सभी प्राणी समान है, सभी के भाव एवं विचार समान है, एक हैं। सभी एकता के अटूट बन्धन में उसी प्रकार गुथे हुए हैं जिस प्रकार माला में मोती। राष्ट्रीय एकता एक ऐसी भावना है जिसके अनुसार राष्ट्र के समस्त निवासी एक-दूसरे के प्रति सद्भावना रखते हुए राष्ट्र की उन्नति हेतु परस्पर मिलकर कार्य करते हैं। वस्तुतः यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो राष्ट्र का एकीकरण करते हुए उसके निवासियों में पारस्परिक बन्धुत्व और राष्ट्र के प्रति निजत्व का भाव जाग्रत करते हुए राष्ट्र को सुसंगठित और सशक्त बनाती है। इस प्रकार राष्ट्रीय एकता भाषा, धर्म, जाति, सम्प्रदाय, संस्कृति और सभ्यता की भिन्नता होते हुए भी उन्हें एकता के सूत्र में बाँधकर राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देती है। राष्ट्रीय एकता राष्ट्र रूपी शरीर में आत्मा के समान है। जिस प्रकार आत्माविहीन शरीर प्रयोजनहीन हो जाता है उसी प्रकार राष्ट्र भी राष्ट्रीय एकता के अभाव में टूट जाता है। राष्ट्रीय एकता के लिए भाषा, धर्म, जाति और संस्कृति की एकता आवश्यक नहीं होती और विविधता बाधक नहीं बनती। राष्ट्रीय एकता तो विविधता के बीच ही जन्म लेती हुई फूलती और फलती है। हमारा देश भारत एक ऐसा ही देश है। यहाँ भाषा, धर्म, जाति, सम्प्रदाय, संस्कृति और सभ्यता आदि की भिन्नता पायी जाती है। लेकिन फिर भी यह एक गौरवशाली राष्ट्र है और राष्ट्रीय एकता इसकी मौलिक विशेषता है। राष्ट्रीय एकता से सम्बन्धित कुछ प्रमुख विचार राष्ट्रीय एकता सम्मेलन के अनुसार– “राष्ट्रीय एकता एक मनोवैज्ञानिक एवं शैक्षिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा लोगों के दिलों में एकता, संगठन एवं सन्निकटता की भावना, सामान्य, नागरिकता की भावना और राष्ट्र के प्रति भक्ति की भावना का विकास किया जाता है।”२ नवभारत टाइम्स के प्रधान सम्पादक श्री अक्षय कुमार जैन के अनुसार–


१. गीता ६/२९ २. आधुनिक सामाजिक विज्ञान / लेखक उदयवीर तथा शकुन्तला सक्सेना, पृ० ३३३ CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar