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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri प्रथम अध्याय 17 १. भौगोलिकता २. नागरिकता ३. धर्म ४. राष्ट्रभाषा ५. राष्ट्रीय प्रतीक ६. राष्ट्रीय पर्व ७. सामाजिक समानता ८. साहित्य ९. संस्कृति १. भौगोलिकता- राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता के निर्माण हेतु भौगोलिक एकता अत्यन्त आवश्यक तत्त्व है जिसके अभाव में नागरिकों में एकरूपता उत्पन्न नहीं हो पाती और वह अपनी भाषा, संस्कृति से तादात्म्य भी स्थापित नहीं कर पाते। भौगोलिक स्थिति, जलवायु तथा रहन-सहन का मनुष्य पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। भौगोलिक एकता के कारण ही अखण्ड राष्ट्र की कल्पना की जा सकती है। भौगोलिक एकता एवम् अखण्ड राष्ट्र पर बल देते हुए रूथना स्वामी कहते है कि "किसी देश की जनता में भले राजनीतिक तथा धर्म के कारण विभिन्नता पैदा हो जाये, किन्तु एक देश में निवास और देश-प्रेम की भावना उसे एकता के सूत्र में बाँधे रहती है।'"१ गिलक्राइस्ट के शब्दों में- एक निश्चित भू-भाग पर निरन्तर एक साथ रहना राष्ट्रीयता के विकास के लिए आवश्यक है।२ उपर्युक्त विचारों से स्पष्ट है कि राष्ट्रीय एकता तथा राष्ट्रीय अखण्डता के विकास में भौगोलिक एकता का अपना महत्त्वपूर्ण योगदान है, जिसका प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक गठन, सामाजिक जीवन तथा चरित्र पर अवश्य ही पड़ता है। २. नागरिकता- नागरिकता नागरिक शब्द की भाववाचक संज्ञा है। नागरिकता से नागरिक के उन अधिकारों और कर्त्तव्यों का बोध होता है जो उसे राष्ट्र की ओर से मिले हुए रहते हैं तथा नागरिक की श्रेणी प्रदान करते हैं। यह एक वैधानिक स्थिति है जो १. नागरिक शास्त्र के सिद्धान्त, पृ० ४०७ २. नागरिक शास्त्र के सिद्धान्त, पृ० ४०७ CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar