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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 48

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 20 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता समुदाय की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होती है। प्रत्येक राष्ट्र में बोली जाने वाली विविध भाषाओं में से जिस भाषा को संविधान द्वारा राष्ट्रभाषा घोषित किया जाता है वही भाषा राष्ट्रभाषा कहलाती है। उस भाषा में ही राष्ट्र के समस्त कार्य होते हैं तथा अन्य भाषाओं की अपेक्षा उसका सर्वाधिक महत्त्व होता है। अतः बहुभाषी होते हुए भी प्रत्येक राष्ट्र में एक राष्ट्रभाषा होना अति अनिवार्य है। गाँधी जी ने कहा था- “राष्ट्रभाषा के बिना प्रत्येक वह राष्ट्र गूँगा है।” जिस प्रकार भारत बहुभाषी राष्ट्र है। यहाँ संविधान द्वारा १४ भाषाएँ मान्य हैं। भाषा की इस अनेकता में एकता को प्रतिपादित करने का श्रेय संविधान द्वारा हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रदान किया गया है। हिन्दी में वह सभी गुण विद्यमान है जो राष्ट्रभाषा बनने हेतु अपेक्षित है। यह अन्य भाषाओं की अपेक्षा सरल और बोधगम्य है। इसका साहित्य विशाल तथा पूर्ण है। विदेशी भी कुछ समय में ही थोड़े से परिश्रम से सरलता से सीख सकते हैं और भारतीयों से उनकी राष्ट्रभाषा में ही पारस्परिक सम्पर्क, सद्भाव और सहयोग स्थापित कर सकते हैं। इस प्रकार राष्ट्रभाषा राष्ट्रीय एकता को बनाये रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। “राष्ट्रीय भावनाओं को जाग्रत करने का सफल आधार होने के कारण कई विद्वानों ने भाषा की एकता को महत्त्वपूर्ण बताया है।” ५. राष्ट्रीय प्रतीक एवम् चिह्न- प्रत्येक राष्ट्र के अपने राष्ट्रीय प्रतीक तथा चिह्न होते हैं जो राष्ट्र को अन्य राष्ट्रों से भिन्न करते हैं तथा उसकी पहचान बनाते हैं। ये प्रतीक चिह्न राष्ट्र को एकरूपता प्रदान करते हैं। जिस प्रकार हमारे राष्ट्र भारतवर्ष के राष्ट्रीय प्रतीक- राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और भारत सरकार का राष्ट्रीय चिह्न भारत के प्रमुख प्रतीक हैं, जो राष्ट्र को एकरूपता की डोरी में बाँधे हुए हैं। राष्ट्रीयध्वज हमारी स्वतन्त्रता, एकता तथा समानता का प्रतीक है। इसमें केसरिया, श्वेत और हरा रंग है, जो जागृति, शौर्य, त्याग, सत्य, पवित्रता तथा समृद्धि के प्रतीक हैं। मध्य में स्थित नीले रंग का चक्र धर्म तथा ईमानदारी का। प्रसिद्ध कवि रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित 'जन गण मन' राष्ट्रगान ध्वज फहराने के तुरन्त बाद सावधान की मुद्रा में गाया जाता है। भारत सरकार के दो भाग है- शीर्ष और आधार। शीर्ष की ओर बने सिंह साहस और शक्ति के प्रतीक हैं, शीर्ष के नीचे देवनागरी लिपि में 'सत्यमेव जयते' लिखा है। आधार के बांयी, दांयी ओर बना घोड़ा और वृषभ ताकत और चाल तथा कठिन परिश्रम और स्फूर्ति के तथा इनके मध्य बना चक्र धर्म का प्रतीक है। यह चिह्न सभी नोटों, सिक्कों तथा सरकारी पुस्तकों पर देखा जा सकता है। इस प्रकार राष्ट्रीय प्रतीक एवम् चिह्न राष्ट्रीय एकता के सन्देश वाहक है जो राष्ट्र की अलग पहचान बनाते हैं अर्थात् राष्ट्र को परिचय CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar