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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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प्रथम अध्याय 21 प्रदान करते हैं। ६. राष्ट्रीय पर्व- राष्ट्रीय एकता एवम् भावात्मक एकता को बढ़ाने में राष्ट्रीय पर्वों का अपना विशेष महत्त्व है। इन पर्वों को सभी देशवासी चाहे वह किसी भी वर्ग अथवा सम्प्रदाय के हो एक साथ मिल-जुलकर प्रेमपूर्वक मनाते हैं। जिससे उनमें पारस्परिक भेद-भाव, ऊँच नीच की भावना मिट जाती है। राष्ट्र को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म मानते हुए राष्ट्रीयएकता के प्रति सदैव सजग रहते हैं तथा अखण्डराष्ट्र के संरक्षण हेतु सदैव तत्पर रहते हैं और राष्ट्रीयएकता एवम् राष्ट्रीयअखण्डता में बाधक तत्त्वों का निराकरण करते हैं। इस प्रकार राष्ट्रीय पर्व अखण्ड राष्ट्र के निर्माण में सहायक हैं और उसके प्राणतत्त्व राष्ट्रीय एकता के आधार स्तम्भ है। ७. सामाजिक समानता- सामाजिक समानता का अर्थ है समाज के सभी व्यक्तियों को समान समझना। रूप, रंग, जाति, धर्म, लिंग, धनी, निर्धन आदि के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्र की महत्त्वपूर्ण निधि राष्ट्रीयएकता को तभी बनाये रखा जा सकता है जब समाज में सामाजिक समानता व्याप्त हो और तभी राष्ट्र की अखण्डता बनी रह सकती है। जब तक समाज में विषमताएँ व्याप्त रहेंगी तब तक राष्ट्रीयएकता एवम् राष्ट्रीयअखण्डता के मार्ग में कठिनाईयाँ आती ही रहेंगी। समाज की नींव खोखली हो जायेगी और राष्ट्र टूट जायेगा। अतः सामाजिक असमानता को समाप्त करके ही राष्ट्र की महत्त्वपूर्ण निधि को बचाया जा सकता है क्योंकि सामाजिक समानता ही एक ऐसा तत्त्व है जो राष्ट्र की एकता तथा अखण्डता को सुरक्षा प्रदान कर सकता है अन्य कोई नहीं। भगवान् श्री कृष्ण ने गीता में अर्जुन से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि "सर्वश्रेष्ठ पुरुष वह है जो सबको अपने समान ही समझे।" ८. साहित्य- "हितेन सहितमिति सहितम्। सहितस्य भावमिति साहित्यम्" अर्थात् हितपूर्ण भावों को ही साहित्य कहते है। साहित्य के सम्बन्ध में रविन्द्रनाथ टैगोर ने कहा है कि "साहित्य शब्द से साहित्य में मिलने अर्थात् एक साथ होने का भाव देखा जाता है, वह मिलन मनुष्य का मनुष्य के साथ, अतीत का वर्तमान के साथ, दूर का निकट के साथ अत्यन्त अन्तरंग मिलन है।" 'साहित्य' साहित्यकार की वह अमरकृति है जो समाज में चेतना का मन्त्र फूँकती है जिससे अकर्मण्य, आलसी व निराश लोगों CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar