भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 51

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri प्रथम अध्याय 23 सम्भवतः किसी को नहीं। राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता को संस्कृति धर्म, दर्शन, विचारों, कविता, संगीत और कला के माध्यम से स्थायित्व प्रदान करती है तथा अपने पराये के भाव को समाप्त कर सम्पूर्ण पृथ्वी को कुटुम्ब के रूप में मानने की प्रेरणा प्रदान करती है। जैसे हिन्दू पुराण के अनुसार— अयं निजः परः वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥१ अर्थात् अपना और पराया आदि भाव क्षुद्र व्यक्तियों के हृदय में ही उत्पन्न होते हैं। उदार हृदय व्यक्ति तो समस्त विश्व को ही एक कुटुम्ब के रूप में अनुभव करते हैं। इस प्रकार संस्कृति मनुष्य के क्षुद्र अर्थात् संकीर्ण विचारों को त्याग कर विस्तृत विचारों को अपनाने की प्रेरणा प्रदान करती है। जैसे हमारा राष्ट्र भारत एक धर्मावलम्बी देश है और यहाँ की संस्कृति भी धार्मिक भावना से ओत-प्रोत है। धर्म से तात्पर्य यहाँ कल्याण तथा सबके सुखी रहने की भावना से है। इस प्रकार भारतीय संस्कृति धार्मिक, आध्यात्मिक तथा विश्व-बन्धुत्व की भावना से अनुप्राणित है। यथा— सर्वेभवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भाग्भवेत्॥२ उपर्युक्त वैदिक मन्त्र का स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सारी आयु जाप किया तथा उपदेश दिया। उपर्युक्त उद्धरण से स्पष्ट है कि विश्वशान्ति और विश्वबन्धुत्व भारतीय संस्कृति का मूल है। "सा प्रथमा संस्कृतिः विश्ववारा"— यह संस्कृति विश्व की सबसे प्रधान तथा प्राचीन संस्कृति है। अपनी संस्कृति के कारण ही भारत सदैव अमर रहेगा। स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय संस्कृति को इस प्रकार अपने शब्दों में व्यक्त किया है। "भारतीय संस्कृति पश्चिमी संस्कृति की अपेक्षा श्रेष्ठ है क्योंकि पश्चिमी संस्कृति भौतिकवादी है, जबकि भारतीय संस्कृति आध्यात्मवादी है, इसलिए भारतीय राष्ट्र अमर है।'"३ इस प्रकार भारतीय संस्कृति अक्षुण्ण, सनातन तथा राष्ट्रीयएकता एवम् अखण्डता की द्योतक है। १. हिन्दू पुराण २. संस्कृत परिचायिका ३. आर० सी० अग्रवाल की भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन एवम् संवैधानिक विकास, पृ० १ CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar