वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
DevanagariHindipublished353 पृष्ठ
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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 24 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता का प्रयोजन :- राष्ट्र का मूल प्रयोजन होता है समस्त देशवासियों का शैक्षिक, नैतिक, मनोवैज्ञानिक, आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक, अर्थात् प्रत्येक दृष्टि से नागरिकों का सर्वतोमुखी विकास करना, क्योंकि जब तक नागरिकों का सर्वतोमुखी विकास नहीं होगा तब तक वह स्वयं से असन्तुष्ट रहेंगे तथा अनेक दुर्गुणों से स्वयं को लिस पायेंगे तथा असन्तुष्ट और (अशिक्षित) असभ्य व्यक्ति से राष्ट्रीय एकता अथवा राष्ट्रहित और राष्ट्रीय अखण्डता की अपेक्षा करना निस्सार है। इस प्रकार राष्ट्रीय एकता एवम् राष्ट्रीय अखण्डता का प्रयोजन है सर्वप्रथम मनुष्य के सर्वतोमुखी विकास हेतु समानावसर प्रदान करना तथा उसमें आदर्श नागरिकता का संचार करना। आदर्श नागरिकता का संचरण तभी किया जा सकता है जब व्यक्ति सुशिक्षित हो क्योंकि शिक्षा ही मनुष्य का सर्वाङ्गीण विकास करती है। गाँधी जी ने भी इस सम्बन्ध में कहा है कि "शिक्षा जो आत्मा की रोटी है, स्वस्थ नागरिकता की प्रथम शर्त है।"१ उपर्युक्त विचार से सहमत बेनी प्रसाद जी ने भी अपना मत इस प्रकार प्रस्तुत किया है। "शिक्षा अच्छे नागरिक जीवन के वृत्तखण्ड की आधार शिला है शिक्षा समान अवसर लाती है जो नागरिक जीवन का मूलतत्त्व है।"२ इस प्रकार आदर्श नागरिकता ही मनुष्य को बुद्धिमान्, संयमी, जागरुक, सुशिक्षित, कर्त्तव्यपरायण, व्यवहार कुशल, निःस्वार्थ, परिश्रमी, मितव्ययी, देशप्रेमी, राष्ट्रीय एकता एवम् राष्ट्रीय अखण्डता का सजग प्रहरी बनने की प्रेरणा प्रदान करती है। राष्ट्रीय एकता के प्रयोजन को सार्थकता प्रदान करने हेतु आवश्यक है— प्रत्येक देशवासी के लिए शिक्षा के समानावसर प्रदान करना। जिसके लिए राष्ट्र के प्रत्येक गाँव में, नगर-नगर में, स्थान-स्थान पर स्कूल कॉलेजों की स्थापना करना तथा प्रौढ़ों के लिए उनके सुविधानुसार शिक्षा के अवसर प्रदान करना। पिछड़े वर्गों तथा निर्धन छात्र-छात्रों के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करना। प्राथमिक स्तर तक विशेष शिक्षा की व्यवस्था करना जिससे बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय एकता की भावना पनप सके और अखण्ड राष्ट्र को प्रत्येक राष्ट्रवासी अपना परिवार तथा प्रत्येक देशवासी को अपना सम्बन्धी समझ सकें।
१. नागरिक शास्त्र के सिद्धान्त, पृ० ३०३ २. नागरिक शास्त्र के सिद्धान्त, पृ० ३०४ CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar