वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें28 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री कृष्णन् ने राष्ट्रीय एकता को एक समस्या कहा है और जिसका समाधान करना अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि राष्ट्र से हमारा घनिष्ठ सम्बन्ध है। राष्ट्र ही हमारा अस्तित्व है। अतः राष्ट्र के अस्तित्व को बनाये रखते हेतु राष्ट्रीय एकता का होना अत्यन्त आवश्यक है। राष्ट्रीय एकता के द्वारा ही हम स्वयं को तथा अपने राष्ट्र को सुरक्षित कर सकते हैं। वाई०वी० चव्हाण भारतीयों को राष्ट्रीय एकता से सम्बद्ध करते हुए कहते हैं कि- "राष्ट्रीय एकता समय का सबसे बड़ा सवाल है और हर कीमत पर उसे बनाये रखना है। प्रत्येक नागरिक को यह सोचना चाहिए कि पहले वह भारतीय है, इसके बाद और कुछ।"१ श्री चव्हाण जी के उपर्युक्त मत से स्पष्ट है कि कोई भी व्यक्ति पहले भारतीय है तत्पश्चात् कुछ और। अतः इस प्रकार धर्म, जाति, सम्प्रदाय, संस्कृति, सभ्यता, प्रान्त आदि की विविधता राष्ट्रीय एकता में बाधक नहीं, अपितु उन्हें राष्ट्रीयता रूपी एकता के सूत्र में बाँधने में साधक ही है। राष्ट्रीय एकता के प्रति भारतीयों का ध्यान आकर्षित करते हुए डा० कानूनगो लिखते हैं कि "राष्ट्रीय एकता की हर देश को हर समय आवश्यकता है। किन्तु भारत के लिए इसकी कहीं अधिक आवश्यकता है।"२ राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता विषय का उद्देश्य :- राष्ट्रीय एकता राष्ट्र का प्राणतत्त्व होती है। जिस प्रकार प्राण के अभाव में शरीर निष्प्रयोजन हो जाता है उसी प्रकार राष्ट्रीय एकता के अभाव में राष्ट्र का अस्तित्व ही नहीं रह जाता। एकता अर्थात् राष्ट्रीय एकता से तात्पर्य है राष्ट्र के व्यक्तियों में, स्थान, भाषा, धर्म, जाति, संस्कृति आदि किसी भी आधार पर भिन्नता होते हुए भी उन्हें एकता के सूत्र में बँधे रहना। राष्ट्रीय एकता की उपमा हम वृक्ष से दे सकते हैं :- राष्ट्रीयएकता एक सम्पूर्ण वृक्ष है जिसकी शाखाएँ भिन्न-भिन्न सम्प्रदायों के मनुष्य हैं, उन शाखाओं के फूल और फल रीतिरिवाज व विचारधारायें हैं और तना है राष्ट्र। वृक्ष से यदि शाखाओं, फल-फूल, पत्ती और तने को पृथक् कर दिया जाये तो उसे हम सम्पूर्ण वृक्ष नहीं कह सकते, इसी प्रकार राष्ट्रीय एकता भी समस्त नागरिकों को राष्ट्र से जुड़ने अर्थात् १. हाई स्कूल सामाजिक विज्ञान भाग-१, पृ० ३६१ २. शिक्षा के सामान्य सिद्धान्त, लेखक- पाठक एवं त्यागी, पृ० १६४।