वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 30 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता रात से तुम मिलो चाँदनी की तरह, और दिन से मिलो रोशनी की तरह। प्रार्थना मेरी तुमसे ये है दोस्तो, आदमी से मिलो आदमी की तरह॥ इस प्रकार राष्ट्र की एकता एवम् अखण्डता का प्रमुख उद्देश्य है राष्ट्र को आन्तरिक तथा बाह्य रूप से सुरक्षा प्रदान करना। यह सुरक्षा तभी प्रदान की जा सकती है जब राष्ट्र के समस्त नागरिक एकता की डोर में बँधे हो। यही बन्धन उनमें राष्ट्रीयता की भावना को बल प्रदान करता है। जिससे लोगों में 'हम' की भावना पनपती है और राष्ट्र सबल होता है तथा किसी भी परिस्थिति में आन्तरिक तथा बाह्य दोनों रूप में किसी भी संकट का सामना सरलता से कर सकता है और यह राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता के द्वारा ही सम्भव है क्योंकि राष्ट्र में एकता नहीं होगी तो राष्ट्र टुकड़ों-टुकड़ों में बँट जायेगा और चरमरा कर ढह जायेगा। इस प्रकार राष्ट्र की आन्तरिक तथा बाह्य सुरक्षा राष्ट्रीय एकता एवम् अखण्डता पर निर्भर है और राष्ट्र, समस्त नागरिकों की एकता की भावना पर। राष्ट्र के समस्त निवासियों पर राष्ट्र की बाह्य तथा आन्तरिक सुरक्षा हेतु पारस्परिक सहयोग अपेक्षित है और प्रत्येक जन-जन का सहयोग तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब उनमें 'हम' की भावना हो। यही भावना उन्हें राष्ट्र से जोड़ती है और राष्ट्र की आन्तरिक व बाह्य सुरक्षा करने को तैयार करती है। विदेशियों द्वारा आक्रमण किये जाने पर या किसी विशेष परिस्थिति, आतंकवाद, अराजकता, अशांति का सामना करने हेतु एकता आवश्यक तत्त्व है और इस तत्त्व के सहयोग से ही राष्ट्र में एकता स्थापित की जा सकती है तथा राष्ट्र को अखण्ड सदैव रखा जा सकता है। देश में शान्ति का स्थायित्व राष्ट्रीय एकता के द्वारा ही प्रदान किया जा सकता है। अगर धर्म, सम्प्रदाय, जाति, वर्ण-भेद आदि को समाप्त कर, सब एक हो जाएँ और राष्ट्र को सर्वाधिक महत्त्व प्रदान करें और यह अनुभव करें कि हम सब एक हैं तो सम्भवतः राष्ट्र में सदैव शान्ति बनी रहेगी, जिससे राष्ट्र प्रत्येक क्षेत्र में उन्नति करेगा। विदेशों में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करेगा तथा राष्ट्रीय स्तर ऊँचा उठेगा। राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के द्वारा ही राजनैतिक वातावरण स्वच्छ रह सकता है क्योंकि जब प्रत्येक राजनेता निःस्वार्थ भाव से राष्ट्रहित के लिए कार्य करेगा तो स्वतः ही राष्ट्र का राजनैतिक वातावरण स्वस्थ होगा, जिससे राष्ट्र की शासन-व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहेगी। CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar