वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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32 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता
समस्याओं का निवारण करने की शक्ति होती है जो राष्ट्र के लिए अहितकर हों, अर्थात् राष्ट्रीय एकता व राष्ट्रीय अखण्डता के मार्ग में बाधक हो। इसी कारण राष्ट्रीय एकता व अखण्डता का विषय सर्वथा मौलिक है, जिसकी मौलिकता सदैव बनी रहती है। उक्तानुसार राष्ट्रीय एकता व राष्ट्रीय अखण्डता का हमारे जीवन में अत्यधिक महत्त्व है। राष्ट्रीय एकता राष्ट्र रूपी शरीर में रीढ़ की हड्डी के समान होती है। जिस प्रकार रीढ़ की हड्डी के टूट जाने पर मनुष्य जीवित तो रह सकता है लेकिन सीधा चल-फिर नहीं सकता अर्थात् बिना किसी सहारे के अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता, स्वतन्त्र रूप से कोई कार्य नहीं कर सकता, उसी प्रकार राष्ट्रीय एकता व अखण्डता के अभाव में राष्ट्र किसी भी प्रकार की उन्नति नहीं कर पाता, जिसके कारण राष्ट्र विभिन्न खण्डों में विभक्त हो जाता है। विखण्डित राष्ट्र खण्डित रीढ़ युक्त शरीर के समान जीवित रहते हुए भी मृत शरीर के समान ही होता है और स्वेच्छा से कोई कार्य भी नहीं कर पाता है क्योंकि राष्ट्रीय एकता राष्ट्र का मूल तत्त्व होती है जिसके अभाव में कोई भी राष्ट्र बहुत दिनों तक जीवित ही नहीं रह सकता। जाति- धर्म के नाम पर जो साम्प्रदायिक दंगे व खून-खराबा होता है वह सब राष्ट्रीय एकता के समूल विनाशक हैं। राष्ट्रीय एकता व अखण्डता के महत्त्व को दृष्टिगत रखते हुए आज आवश्यकता है कि हम प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र से जोड़ें, उसमें राष्ट्रीयएकता का विकास करें। राष्ट्रहित के समक्ष अपने हितों का त्याग करने के लिए सदैव तत्पर रहें। यदि आज भी हमने यह सब कार्य नहीं किया तो राष्ट्र का अस्तित्व चरमरा कर ढह जायेगा, जिसकी शासन व्यवस्था सुचारु रूप से कार्य नहीं कर सकेगी तथा उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा। राष्ट्रीय एकता एवम् राष्ट्रीय अखण्डता के द्वारा ही राष्ट्र में सुव्यवस्था बनाई जा सकती है तथा अपने मूल आदर्शों व सत्यं शिवं सुन्दरम् की स्थापना कर सकते हैं, जो राष्ट्रीय एकता को बनाये रखने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपनी संस्कृति से अत्यधिक प्रभावित होता है। मूल आदर्शों के कारण ही उसके हृदय में प्रेम, सहयोग, परोपकार, सहिष्णुता, नम्रता, नैतिकता, सदाचार आदि का विकास होता है। आदर्शों को जीवन में उतारने के कारण ही अर्थात् वह दूसरों के विचारों तथा भावनाओं को समझ पाते हैं, जिससे उनके विचारों में भावात्मक-एकता की झलक देखने को मिलती है और यही भावात्मक-एकता राष्ट्रीय एकता को जन्म देती है। इस प्रकार आदर्शों के द्वारा राष्ट्रीयएकता व अखण्डता के महत्त्व को सरलता से समझा जा सकता है।
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar