वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri द्वितीय अध्याय 49 सम्बन्ध में ध्यानस्थ अवस्था में प्रत्यक्षीकृत ज्ञान का विशाल भण्डार है। " इन ग्रन्थों में एक अत्यन्त पुरातन् भारतीय दर्शन का मूलाधार निहित है। प्राचीन काल में इन ग्रन्थों का बृहद् भण्डार अवश्य रहा होगा और वे ग्रन्थ— गायकों, पुरोहितों एवं विचारकों द्वारा कण्ठस्थ करके कुल क्रमागत रूप में दूसरी पीढ़ियों को प्राप्त कराए जाते रहे होंगे। किन्तु विभिन्न कालों में वेद विरोधी शक्तियों द्वारा अनेक वैदिक ग्रन्थ नष्ट कर दिए गए। उन्हीं में ढेरों उपनिषद् भी समास हो गएं। इसी कारण अब उपलब्ध वैदिक साहित्य अत्यन्त अल्प है, फिर भी इतना अधिक तथा उत्कृष्ट है। उपनिषदों की संख्या के विषय में विद्वानों में पर्याप्त मतभेद हैं। मुक्तिकोपनिषद् में १०८ उपनिषदों की सूची दी गई है, जिनमें दस उपनिषद् "ऋग्वेद" से सम्बन्धित, उन्नीस "शुक्ल यजुर्वेद" से, बारह 'कृष्ण यजुर्वेद' से, सोलह "सामवेद" से तथा इकतीस "अथर्ववेद" से सम्बन्धित है। किन्तु शङ्कराचार्य ने केवल दस उपनिषदों पर अपना भाष्य लिखा है, वे ही प्रामाणिक उपनिषद् हैं। मुक्तिकोपनिषद् के अनुसार उनके नाम एवं क्रम इस प्रकार हैं— १. ईशोपनिषद् ६. माण्डूक्योपनिषद् २. केनोपनिषद् ७. तैत्तरीयोपनिषद् ३. कठोपनिषद् ८. ऐतरेयोपनिषद् ४. प्रश्नोपनिषद् ९. छान्दोग्योपनिषद् ५. मुण्डकोपनिषद् १० बृहदारण्यकोपनिषद् उपर्युक्त दस उपनिषदों के अतिरिक्त तीन अन्य उपनिषद् भी प्राचीन माने जाते हैं क्योंकि शङ्कराचार्य ने "ब्रह्मसूत्र भाष्य" में इनका नामोल्लेख किया है; वे हैं— १. कौषीतिकोपनिषद् २. श्वेताश्वतरोपनिषद् ३. मैत्रायणीयोपनिषद् इन उपनिषदों का विस्तृत विवेचन एवं उपनिषद् सम्बन्धी अन्य महत्त्वपूर्ण सामग्री आगे उपनिषदों के पृथक् अध्याय में विस्तारपूर्वक दी गई हैं। वैदिक साहित्य दैविक प्रकाश हैं। इससे निकट का सम्बन्ध रखने वाली रचना 'वेदाङ्ग' है। यह वैदिक साहित्य के अन्तर्गत नहीं आती। वेदाङ्ग :- वेद एक जटिल एवं दुरूह विषय है, भाव की दृष्टि से एवं भाषा की दृष्टि से भी। उसे सरल तथा सुबोध करने के लिए विद्वानों ने एक नूतन सूत्र साहित्य CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar