वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंDigitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri द्वितीय अध्याय 53 प्रदान करती हैं। भारतीय दर्शन में किसी भी विचारधारा की आस्तिकता अथवा नास्तिकता का निर्धारण ईश्वर की सत्ता पर विश्वास करने अथवा न करने से नहीं होता, बल्कि वेदों की प्रामाणिकता को मानने अथवा न मानने से होता है। वेदों के “प्रामाण्य” को स्वीकार करने वाली विचार पद्धति “आस्तिक” तथा वेदों के “प्रामाण्य” को अस्वीकार करने वाली विचार पद्धति ‘नास्तिक’ कहलाती है। सर्वाधिक आश्चर्यजनक एवं महत्त्वपूर्ण विषय तो यह है कि बौद्ध जो कि नास्तिक हैं क्योंकि वे वेदों के प्रामाण्य को नहीं मानते, वे भी वेदों को परब्रह्म द्वारा प्रदत्त अथवा प्रणीत मानते हैं। जिस व्यक्ति, विषय अथवा ग्रन्थ को उसके विरोधी भी आलौकिक स्वीकार करें, इससे अधिक गौरव की बात, उसके लिए दूसरी क्या हो सकती है। वेदों के साथ ऐसा ही है। CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar