भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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70 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता अतः विभिन्न दृष्टियों से वेदों का असाधारण महत्त्व सिद्ध होता है। इसीलिये उनका अध्ययन, मनन तथा संग्रहण परमावश्यक है। वेदाध्ययन की आवश्यकता का निरूपण करते हुए पं० बलदेव उपाध्याय जी ने निम्नलिखित शब्दों में अपने विचार प्रकट किए हैं— भारतीय संस्कृति के इतिहास में वेदों का स्थान नितान्त गौरवपूर्ण है। श्रुति की दृढ़ आधारशिला के ऊपर भारतीय धर्म तथा सभ्यता का भव्य विशाल प्रासाद प्रतिष्ठित है। हिन्दुओं के आचार-विचार, रहन-सहन, धर्म-कर्म को भली भाँति समझने के लिए वेदों का ज्ञान विशेष आवश्यक है। हम ईश्वर विरोध को सहन कर सकते हैं, परन्तु वेदों का आंशिक विरोध भी हमारी दृष्टि में नितान्त वर्जनीय है। "आस्तिक" वही है जो वेद की प्रामाणिकता में विश्वास रखे तथा "नास्तिक" वही है जो वेदों की निन्दा करे। अतः वेद का अनुशीलन प्रत्येक भारतीय का आवश्यक कर्त्तव्य होना चाहिए।