भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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॥ श्रीः ॥

A decorative border consisting of a repeating pattern of stylized floral or geometric motifs. In the center of this border, the word 'निवेदन' (Nivedan) is written in a bold, serif font.

जगदीशकी कृपासे आज "वैराग्यशतक" का तीसरा संस्करण छपकर तैयार है। लेखकको अपनी लिखी पुस्तकके संस्करण पर संस्करण होते देखकर कितनी खुशी होती है, यह कहने की ज़रूरत नहीं। दो-दो हजार प्रतियोंके दो संस्करण शीघ्र ही छप जानेसे साफ मालूम होता है कि, हिन्दी-प्रेमियोंने इस तुच्छातितुच्छ लेखकके अनुवादको बूब पसन्द किया है। हिन्दीके अनेक समाचार पत्रोंने भी हमारे अनुवाद किये नीति, वैराग्य और श्रृंगार शतककी दिल खोलकर तारीफ की है।

पाठकों और पत्र सम्पादकोंके उत्साहवर्द्धनसे उत्साहित होकर, प्रकाशकोंने इस बार इसमें ६ चित्र और भी बढ़ा दिये हैं। पहले संस्करणमें २० और दूसरेमें २६ चित्र थे। इस तीसरे संस्करणमें ३८ हाफटोन चित्र हो गये हैं। इन चित्रोंसे ग्रन्थकी शोभा और भी बढ़ गई है। हमारे एक विद्वान,