भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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दरिद्रावस्था में वैराग्य ।

आपके घरमें कंगालो और मुहताजी का राज है । आप खी-बच्चोंका पालन कर नहीं सकते । इसलिए ही आपको नफ़रतकी नज़र से देखती है । यह सब देखकर आपके दिलमें वैराग्य पैदा हुआ है । यह नीचे दर्जका वैराग्य है । पृष्ठ ४०